आरिफ नियाज़ी।
उत्तराखंड समेत पूरे भारतवर्ष में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत शिक्षको को गैर शैक्षणिक कार्यो में कार्ययोजित किये जाने की मनाही होने के बावजूद प्राथमिक शिक्षको को मुख्यतः बी एल ओ का कार्य दायित्व सौंपा जाता रहा है।

उत्तराखंड राज्य में प्राथमिक शिक्षक एक बहुत बड़ी संख्या में बी एल ओ के रूप में कार्यरत है। लगभग दो माह पूर्व जनपद हरिद्वार सहित पूरे उत्तराखंड में और भी प्राथमिक शिक्षको को बी एल ओ के रूप में नियुक्त किया गया है। जिस पर शिक्षको, शिक्षक संगठनों विशेषकर उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ रुडकी द्वारा अपना विरोध दर्ज कराया गया था।

उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षा संघ रुडकी के ब्लॉक अध्यक्ष मनमोहन शर्मा का कहना है कि प्राथमिक शिक्षकों को बी एल ओ बनाकर उन्हें गैर शैक्षणिक कार्य मे कार्ययोजित करना शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 व उत्तराखंड शासन द्वारा जारी शासनादेश संख्या 890 दिनाँक 17 सितंबर 2018 का उल्लंघन है।

राजकीय विद्यालय पहले से शिक्षको की कमी से जूझ रहे है ऊपर से शिक्षको को बी एल ओ जैसे गैर शैक्षणिक कार्य मे कार्ययोजित कर देने से राजकीय विद्यालयों में शिक्षको की कमी और ज्यादा हुई है। जिसके कारण राजकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले गरीब, अपवंचित वर्ग के बालक बालिकाओं की शिक्षा पर और भी ज्यादा कुप्रभाव पड़ा है। जहाँ सरकारे एक तरफ शिक्षा को अधिकार बता रही वही शिक्षको को बी एल ओ में कार्ययोजित करने से बालक बालिकाओं को इस अधिकार से वंचित किया जा रहा है। प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले गरीब अपवंचित वर्ग के बालक बालिकाओं की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित ना हो, शिक्षको को गैर शैक्षणिक कार्य मे कार्ययोजित ना किए जाए, शिक्षा का अधिकार अधिनियम का सम्मान हो इन सबके व भारत निर्वाचन आयोग के बी एल ओ नियुक्ति के सम्बंध में जारी पत्र संख्या 23 दिनाँक 03 नवंबर 2010 के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली को पत्र लिखकर प्राथमिक शिक्षको को बी एल ओ से कार्यमुक्त करने व शिक्षकों के स्थान पर अन्य श्रेणी के सरकारी अर्द्धसरकारी कार्मिकों को बी एल ओ बनाये जाने हेतु अनुरोध पत्र प्रेषित किया गया था। जिस पर भारत निर्वाचन आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड को बी एल ओ की नियुक्ति हेतु भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु पत्र जारी किया है। भारत निर्वाचन आयोग के उक्त पत्र के अनुक्रम में मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड द्वारा भी उत्तराखंड राज्य के समस्त जिला अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों को प्रकरण पर नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करने हेतु पत्र जारी कर दिया गया है।
मनमोहन शर्मा का कहना है कि यदि भारत निर्वाचन आयोग के पत्र के बाद उत्तराखंड पूरे भारतवर्ष में वह पहला राज्य बन सकता है जहां शिक्षको को बी एल ओ जैसे गैर शैक्षणिक कार्य से पूर्ण रूप से मुक्त कर दिया जाए। आशा है अब उत्तराखंड राज्य के समस्त जनपदों के जिला अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी शिक्षा का अधिकार अधिनियम व उत्तराखंड राज्य के शासनादेशों का सम्मान करते हुए, गरीब अपवंचित वर्ग के बालक बालिकाओं की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को समाप्त करने के लिए शिक्षको को जल्द से जल्द बी एल ओ ड्यूटी से कार्यमुक्त कर उनके स्थान पर अन्य सरकारी अर्द्धसरकारी कार्मिकों को बी एल ओ बनायेगे।





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