आरिफ नियाज़ी
कोरोना माहमारी में जहां हर तबके के लोग अपने कारोबार को लेकर खासे परेशान हैं वहीं धार्मिक स्थलों पर रहने वाले लोग भी बेहद परेशान हो चुके हैं। इतना ही नहीं लॉकडाउन के चलते धार्मिक स्थलों को पूरी तरह से बंद करने से वहां पर काम करने वाले लोगों को अपना परिवार चालाना बेहद मुश्किल हो गया है अगर जल्द ही धार्मिक स्थल ना खोले गए तो ऐसे लोगों के परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
जी हां हम बात कर रहे हैं विश्व प्रसिद्ध दरगाह कलियर शरीफ की जो लौकडाउन में पूरी तरह से बंद है दरगाह बंद होने से बाहर से आने वाले ज़ायरीन भी कलियर शरीफ नहीं पहुंच पा रहे हैं । प्रशासन ने दरगाह को बंद करने का आदेश दिया था लेकिन दरगाह कब तक बंद रहेगी अभी इसकी जानकारी नहीं है हालांकि कलियर शरीफ में बहुत कुछ बाहर से आने वाले जायरीनों पर निर्भर रहता है अगर ज़ायरीन नहीं पहुंचे तो इसका कलियर में रह रहे सभी तबकों के लोगों पर खासा प्रभाव पड़ता है
मसलन स्थानीय दुकानदार हों या फिर दरगाह की खिदमात को अंजाम देने वाले लोग हों वह अधिकांश ज़ायरीनों पर निर्भर रहते हैं लेकिन ऐसे में जब बाहर से ज़ायरीन कलियर शरीफ नहीं पहुंच पा रहे हैं तो स्थानीय दुकानदारों के सामने भी रोज़ी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
दुकानो का किराया देना भी बेहद मुश्किल काम है अगर जल्द ही दरगाह को खोलने की अनुमति नहीं मिली तो हालात और भी खराब हो जाएंगे।हालांकि इस बाबत दुकानदार भी प्रशासन से कई बार मांग कर चुके हैं अब देखना ये है कि दरगाह खोलने की अनुमति प्रशासन कब तक दे पाता है। वहीं लॉकडाउन के समय का दुकानदारों का किराया माफ करने की मांग कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलीम खान ने की है।




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