आरिफ नियाज़ी।
रूड़की कांग्रेस नेता आशीष सैनी ने बढ़ती विद्युत दरों के लिए जिम्मेदार पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड देहरादून (PITCUL). उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम लि०, देहरादून (UJVNL), उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लि०, देहरादून (UPCL) के प्रबन्ध निदेशक चयन प्रक्रिया में व्यापक भ्रष्ट आचरण करने वाले अधिकारियों को प्रतिबन्धित किए जाने एवं विभागीय घाटे की भरपाई आम विद्युत उपभोक्ताओं से जाने को रोकने के सम्बन्ध में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है
कांग्रेस नेता आशीष सैनी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लि०, देहरादून (PITCUL), उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम लि०, देहरादून (UJVNL), उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लि0, देहरादून (UPCL) के प्रबन्ध निदेशक चयन प्रक्रिया में व्यापक भ्रष्ट आचरण करने वाले अधिकारियों के भ्रष्टाचार एवं विभाग को हुए आर्थिक लूट के कारण आम उपभोक्ता पर विद्युत दर का अधिभार डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य की उर्जा आवश्यकता, अर्थव्यवस्था एवं जनहित से जुड़े कार्य को दृष्टिगत रखते हुए संज्ञान लेना आवश्यक है कि उपरोक्त वर्णित पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लि०, देहरादून (PITCUL), उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम लि०, देहरादून (UJVNL), उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लि0, देहरादून (UPCL) विभाग में महंगी दरों पर विद्युत उपकरणों, सब स्टेशनों, पावर प्लांट की स्थापना एवं संचालन में खुली लूट जारी है. उक्त अतिरिक्त भ्रष्टाचार एवं घाटे की भरपाई आम उपभेक्ता से अनवरत किया जाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उपरोक्त पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लि०, देहरादून (PITCUL), उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम लि०, देहरादून (UJVNL), उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लि०, देहरादून (UPCL) के विगत पांच वर्षों में रहे प्रबन्ध निदेशकों एवं निदेशकों की चयन प्रकिया दोषपूर्ण होने का लाभ उठाकर अपात्र के चयन करने की भ्रष्ट परम्परा आज भी जारी है। यह अत्यन्त आवश्यक है कि गैर तकनीकि व्यक्ति का प्रबन्ध निदेशकों एवं निदेशकों के पद पर चयन भ्रष्टाचार की असली जड़ है। विगत 18 फरवरी 2026 में उच्च न्यायालय, नैनीताल द्वारा अपात्र प्रबन्ध निदेशक, पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लि०, देहरादून (PITCUL), को हटाने के बावजूद चयन नियमावली में हटाए गये प्रबन्ध निदेशक की सुविधानुसार संशोधन करना संज्ञेय रुप से भ्रष्टाचार का समर्थन करना प्रतीत हो रहा है।
उन्होंने कहा कि पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लि०, देहरादून (PITCUL), उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम लि०, देहरादून (UJVNL), उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लि0, देहरादून (UPCL) के विगत पांच वर्षों में पदासीन रहे प्रबन्ध निदेशकों एवं निदेशकों द्वारा मिलीभगत कर किए भ्रष्टाचार का नुकसान राज्य के आम विद्युत उपभोक्ताओं को बेतहाशा बढ़ी हुई विद्युत दर के रुप में उठाना पड़ रहा है। विगत पांच वर्षों से आज दिनांक तक यह महंगी दरों पर विद्युत उपकरणों, सब स्टेशनों, पावर प्लांट की स्थापना एवं संचालन में विफलता के कारण हुआ है इसकी गम्भीर रुप से जांच महत्वपूर्ण विषय है।
उन्होंने कहा कि एशियन डेवलेपमेंट बैंक (ए.डी.बी.) द्वारा कर्ज के रुप में जारी बजट का दुरुपयोग कर पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लि०, देहरादून (PITCUL) द्वारा निर्मित सब स्टेशनों में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की दरों पर अनुबन्ध करने के उपरान्त चीन की कम्पनियों के घटिया उपकरण लगाकर करोडों का चूना लगाया जा रहा है। सामान्य रुप से किफायती एवं सुलभ AIR Insulated Substation (AIS) विद्युत सब स्टेशन लगाने के बजाय GAS Insulated Substation (GIS) विद्युत सब स्टेशन लगाए गये हैं। जो कीमत में दोगुने एवं संचालन में आधे समय तक के लिए संभव हैं। GAS Insulated Substation (GIS) विद्युत सब स्टेशन का संचालन साझेदार चीनी कम्पनी होने एवं उसके भाग जाने के कारण करोड़ो का नुकसान विभाग को लगा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लि०, देहरादून (PITCUL) द्वारा बनबसा उत्तराखण्ड में 132 के०वी०ए० का विद्युत सब स्टेशन को आज दिनांक तक वैध रुप से भूमि भी आवंटित नहीं हुई है जबकि उक्त विद्युत सब स्टेशन के निर्माण हेतू लगभग 35 करोड़ रुपये का भुगतान नव नियुक्त प्रबन्ध निदेशक द्वारा बिना किसी जांच-पड़ताल के पूर्व प्रबन्ध निदेशक के भ्रष्टाचारी मिलीभगत के चलते किया गया, जिसके उपकरण इत्यादि बनबसा उत्तराखण्ड में वन विभाग की भूमि पर खुले में पड़े सड़ रहे हैं।
आशीष सैनी ने कहा कि पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लि०, देहरादून (PITCUL) द्वारा बागेश्वर, उत्तराखण्ड में 132 के०वी०ए० का GAS Insulated Substation (GIS) विद्युत सब स्टेशन विगत अगस्त 2025 से बनकर तैयार है परन्तु आज दिनांक तक भी GAS Insulated Substation (GIS) विद्युत सब स्टेशन होने के कारण संचालन नहीं किया जा सका है।
उन्होंने कहा कि पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लि०, देहरादून (PITCUL) द्वारा रामनगर-रुड़की, उत्तराखण्ड में 400 के०वी०ए० का विगत कई माह से अनुबन्ध हो जाने के बाद भी आज दिनांक तक धरातल पर कोई कार्य नहीं किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य जानबूझकर देरी कर लागत में अनियन्त्रित वृद्धि कर विभाग को भारी चूना लगाकर इसका बोझ भी आम विद्युत उपभेक्ता पर ही डालने का एक और षड्यन्त्र का प्रयास दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लि०, देहरादून (PITCUL) द्वारा एशियन डेवलेपमेंट बैंक (ए.डी.बी.) द्वारा वित्तपोषित सभी GAS Insulated Substation (GIS) विद्युत सब स्टेशनों को चीन की जिस कम्पनी द्वारा भागेदारी से लगाए जाने का अनुबन्ध किया गया था, वह चीन की साझेदार कम्पनी द्वारा वर्तमान में साझेदारी से अलग होने अथवा साझेदारी समाप्त हो जाने के कारण संचालन के योग्य नहीं रह गए हैं। इसके कारण उत्तराखण्ड के आम विद्युत उपभेक्ताओं को लगभग 800 करोड़ रुपये के नुकसान की संभावना है।
उन्होंने कहा कि पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लि०, देहरादून (PITCUL) द्वारा उर्जा आवश्यकता, अर्थव्यवस्था एवं जनहित से जुड़े कार्य पावर लाइन को भूमिगत करने के कार्य को दो वर्ष से भी अधिक समय तक लटकाया गया है। उक्त ठेकेदार कम्पनी की समय पर कार्य न करने एवं राजस्व हानि के कारण होने पर भी अभी तक “ब्लैक लिस्ट” नहीं किया गया है। अनेक कार्य में विभागीय मिलीभगत एवं भ्रष्टाचार के चलते भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाया जा चुका है। इसका प्रमाण है कि उक्त कार्य की अलग अलग विभाग में प्रेषित रिपोर्ट है, जिनमें अनेक असमानताएं हैं। 02 फरवरी 2026 को जिलाधिकारी महोदय, देहरादून द्वारा जनसुनवाई एवं शिकायतों का संज्ञान लेते हुए लोक निर्माण विभाग को पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लि०, देहरादून एवं उक्त ठेकेदार के विरुद्ध एफ.आई.आर. दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए, जिस पर भी आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
आशीष सैनी ने कहा कि उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम लि० देहरादून (UJVNL), द्वारा दिनांक 17.06.2025 को निविदा संख्या 01/UJVNL/DGM(Civil-ATTP)/2025-26 (संलग्नक-1) रुपये 537.56 करोड़ का प्रकाशित किया गया। उक्त निविदा में सिविल/हाइड्रो मैकेनिकल / इलैक्ट्रो मैकेनिकल कार्य की संयुक्त निविदा रखी गई थी। प्रकाशित निविदा में पुनः 21.10.2025 को संशोधित कर प्रकाशित किया गया, परन्तु निविदा अनुमानित लागत रुपये 678.56 करोड़ की गई, जिसका कोई उपर्युक्त आधार प्रतीत नहीं हो रहा है। उपरोक्त निविदा को दिनांक 05.12.2025 को अकारण निरस्त कर दिया गया। उल्लिखित निविदा को दिनांक 05.12.2025 को निरस्त करने के उपरान्त दिनांक 09.12.2025 को निविदा संख्या 02/UJVNL/DGM(Civil-ATTP)/2025-26 को पुनः अलग से प्रकाशित कर दिया गया, जिसे मात्र एक माह से भी कम समय में तकनीकि निविदा (पार्ट-1) को खोल दिया गया। जिसमें की दा निविदाएं आई और भारी धनराशि की निविदा को मात्र 15 दन से भी कम समय में तकनीकि आकलन के उपरान्त 23.01.2026 को ही वित्तीय निविदा को खोल दिया गया जबकि इस स्तर की निविदाओं में निविदाकर्ताओं द्वारा प्रेषित हजारों पृष्ठों का अवलोकन व अवलोकन संभव ही नहीं है। परन्तु इस बार निविदा में सिविल/हाइड्रो मैकेनिकल कार्य की निविदा रुपये 538.85 करोड़ रखी गई, जबकि इलैक्ट्रो मैकेनिकल कार्य की निविदा संख्या 01/EM D-III/2025-26 दिनांक 21.01.2026 को रुपये 259.60 करोड अलग से प्रकाशित किया गया। वर्तमान में कमशः 140 करोड एवं 120 करोड का अतिरिक्त बजट बढाया जाना संदिग्ध प्रतीत हो रहा है। जिसका कोई उपर्युक्त कारण भी नहीं है एवं मात्र इलैक्ट्रो मैकेनिकल की निविदा का इतना अधिक मूल्य बढ़ाना भ्रष्ट आचरण का प्रदर्शित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लि०, देहरादून (UPCL) के द्वारा उपरोक्त अन्य दोनों विभागों द्वारा किए जा रहे आर्थिक नुकसान की भरपाई राज्य के सभी उपभोक्ताओं से विद्युत दर को लगातार बढ़ाकर किया जा रहा है। प्रति किलोवाट फिक्स चार्ज को पहले दो माह में लिया जाता था अब उसे दोगुना कर प्रतिमाह वसूला जा रहा है। प्रत्येक माह की बिल अवधि निर्धारित 30 दिनों (एक माह) के बजाय अनेक बार घटाया बढ़ाया जा रहा है। विभागीय भूल से मासिक बिलों में हुई हेराफेरी का नुकसान केवल उपभोक्ता को ही उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने सी एम से मांग करते हुए कहा की पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लि०. देहरादून (PITCUL), उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम लि०, देहरादून (UJVNL), उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लि0, देहरादून (UPCL) के सन्दर्भ में उपरोक्त शिकायत एवं तथ्यों का संज्ञान लेकर कार्यालय द्वारा संभावित भ्रष्टाचार के सम्बन्ध में विशेष जांच दल (एस.आई.टी) एवं उच्च न्यायालय नैनीताल के सम्मानित न्यायाधीश की देख-रेख में व्यापक सघन जांच उवं उचित कार्यवाही कराने का कष्ट करें। जिससे उत्तराखण्ड राज्य के आम उपभोक्ता को बढ़ती विद्युत दर की संगठित लूट से बचाया जा सके। पत्रकार वार्ता में पीसीसी सदस्य,
ठा वीरेंद्र सिंह, प्रदेश पीसीसी सदस्य नासिर प्रवेज़,डॉ रणवीर नागर, सेवादल महानगर अध्यक्ष मौजूद रहे।





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