आरिफ नियाज़ी।
जमीयत उलेमा ए हिन्द के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना आरिफ कड़े तेवर में नज़र आए उन्होंने साफ कर दिया की जो अरबी मदरसे मदरसों के नाम पर मॉडर्न शिक्षा देकर मिड डे मील एवं अन्य सुविधाएं हासिल कर रहे हैँ वह मदरसे नहीं बल्कि स्कूल हैँ जिनकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज दीनी तालीम के साथ साथ आधुनिक शिक्षा भी बेहद जरूरी है लेकिन कुछ अरबी मदरसे स्कूलों में मीड डे मील और अन्य सुविधाएँ लेकर सरकार की योजनाओं को पलीता लगा रहे हैँ जिनकी जांच होनी चाहिए। मौलाना आरिफ ने कहा की मदरसा शिक्षा को लेकर भ्रम फैलाकर मदरसों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है जबकि अरबी मदरसे एक ज़माने से चंदे से चले आ रहे हैँ चंदे से ही मदरसे आज भी चल रहे हैँ। मदरसों में शिक्षा प्राप्त कर बच्चे हाफिज, कारी और मौलवी मौलाना बनकर मस्जिदों और मदरसों में तालीम दे रहे हैं। मौलाना आरिफ ने कहा कि आज़ादी के समय से अरबी मदरसे इस देश में संचालित हो रहे हैं। देश की आजादी में इन मदरसों का विशेष योगदान रहा हैं।मदरसों के शिक्षकों का इस देश के विकास और धार्मिक शिक्षा में विशेष योगदान रहा है। देश को आजादी दिलाने में अनेकों बलिदान दिए गए। उन्होंने कहा कि मदरसों में देश के प्रति कर्तव्यों को भी सिखाया जाता है। मदरसों में पढ़ने एवं पढा़ने वालों ने सरकार के खिलाफ कभी कोई काम नहीं किया है। मदरसों में सच्ची निष्ठा, ईमानदारी, धर्म के प्रति समर्पित भावना का पाठ पढ़ाया जाता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मदरसा शिक्षा एवं मॉडर्न शिक्षा में अंतर को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि मदरसे सरकार से कोई मदद नहीं ले रहे हैं। चंदे के पैसे से मदरसों में शिक्षा देने का काम किया जा रहा है। वर्ष भर का ऑडिट भी किया जाता है। किसी भी प्रकार का घपला नहीं होता है। इसलिए सरकार द्वारा गठित किए जा रहे प्राधिकरण या बोर्ड की कोई आवश्यकता नहीं है।





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