आरिफ नियाज़ी।
रुड़की के झबरेड़ा में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती के पावन अवसर पर झबरेड़ा में भारी समर्थकों और राजनीतिक हलचल के बीच बाबा साहब की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जात्ती ने विधिवत रूप से प्रतिमा का लोकार्पण कर इसे क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया। अब से इस मुख्य चौराहे को आधिकारिक रूप से ‘भीमराव अम्बेडकर चौक’ के नाम से जाना जाएगा।
दरअसल प्रतिमा के अनावरण के दौरान विधायक वीरेंद्र जात्ती ने कहा कि इस प्रतिमा की स्थापना का संकल्प वर्ष 2021-22 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा की गई एक घोषणा का हिस्सा था। उन्होंने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा की
आज बाबा साहब की जयंती पर इस प्रतिमा का अनावरण होना हम सभी के लिए गौरव की बात है। देश के उत्थान और संविधान निर्माण में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। यह चौक आने वाली पीढ़ियों को उनके संघर्ष और विचारों की याद दिलाता रहेगा।”
जहाँ एक ओर माहौल खुशगवार था तो वहीं दूसरी ओर इस अनावरण ने राजनीतिक रंग भी ले लिया। प्रतिमा स्थापना के श्रेय और प्रक्रिया को लेकर भीम आर्मी के महक सिंह और सरकार के राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल ने भी वीरेंद्र जात्ती पर निमंत्रण ना देने का आरोप लगाया इतना ही नहीं प्रतिमा छोटी होने का भी आरोप लगाया। विरोधियों का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में नियमों और मर्यादाओं को ताक पर रखा गया।
विपक्षी आरोपों पर वीरेंद्र जात्ती ने बेहद सधे हुए अंदाज में कहा कि “विपक्षी पार्टियों का काम केवल आरोप लगाना है। जनहित और महापुरुषों के सम्मान में किए गए कार्यों में बाधा डालना उनकी पुरानी आदत है, जिससे जमीनी हकीकत नहीं बदलती।”
गौरतलब है की भले ही डॉ. अम्बेडकर की प्रतिमा का स्थापित होना क्षेत्र के दलित समाज और बाबा साहब के अनुयायियों के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है लेकिन झबरेड़ा के स्थल पर बाबा साहब की मौजूदगी अब एक स्थाई हकीकत बन चुकी है।





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