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जश्न-ए-विलादत-ए मौला अली अ.स. के मौके पर लंगर का आयोजन, हज़रत अली क़ो किया गया याद।

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आरिफ़ नियाज़ी।

रूड़की इस्लामिक कैलेंडर के मुक़द्दस महीने रजब की 13 तारीख़, बामुताबिक आज पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा के अज़ीज़ भाई, दामाद और ख़लीफ़ा-ए-बरहक़ हज़रत अली अ.स. की विलादत के मुबारक मौके पर शहर में अक़ीदत, एहतराम और रूहानियत का माहौल देखने को मिला। मौला अली अ.स. वह अज़ीम शख़्सियत हैं जिन्हें इल्म का दरवाज़ा, इंसाफ़ की मिसाल और इंसानियत का रहनुमा माना जाता है। उनकी ज़िन्दगी बहादुरी, सादगी, सब्र और हक़परस्ती का जीता-जागता नमूना है।

हर साल की तरह इस साल भी अंजुमन ग़ुलामाने मुस्तफ़ा ﷺ सोसाइटी (रजि.), रूड़की चैप्टर की जानिब से इस पाक मौके को बड़ी अक़ीदत, मुहब्बत और ख़ुलूस के साथ मनाया गया।

इसी सिलसिले में 3 जनवरी 2026 को हज़रत अली अ.स. की विलादत की ख़ुशी में आम लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की। यह लंगर रामपुर रोड स्थित उमर एन्क्लेव कॉलोनी के बाहर लगाया गया, जहाँ राजमा-चावल और गाजर के हलवे का तबर्रुक बड़ी तादाद में मौजूद लोगों में तक़सीम किया गया। इस लंगर के ज़रिये यह पैग़ाम दिया गया कि मौला अली अ.स. किसी एक कौम या मज़हब के नहीं, बल्कि हर उस इंसान के रहनुमा हैं जो इंसाफ़, हक़, बराबरी और इंसानियत में यक़ीन रखता है।

इस मौके पर हज़रत अली अ.स. के मशहूर क़ौल को भी याद किया गया—
“ग़रीब का दोस्त और ज़ालिम का दुश्मन बनो।”
तथा
“जिस पर ज़ुल्म हो रहा हो, उसकी मदद करो और ज़ुल्म करने वाले को ज़ुल्म से रोको।”
इन अक़वाल के ज़रिये समाज में इंसाफ़, अमन और भाईचारे का पैग़ाम दिया गया।

अंजुमन ग़ुलामाने मुस्तफ़ा ﷺ सोसाइटी के सेक्रेटरी कुंवर शाहिद ने कहा कि मौला अली अ.स. की तालीमात आज के दौर में भी पूरी इंसानियत के लिए मशाल-ए-राह हैं। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का मक़सद हज़रत अली अ.स. की तालीमात—इंसाफ़, इंसानियत, भाईचारा, सब्र और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़—को समाज के हर तबक़े तक पहुँचाना था। लंगर में शहर के तमाम तबक़ों के लोगों ने बढ़-चढ़ कर शिरकत कर अमन, मुहब्बत और भाईचारे का पैग़ाम दिया।

आयोजकों के मुताबिक लंगर का आग़ाज़ दोपहर 12 बजे किया गया और कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण, मर्यादित और कामयाब तरीके से सम्पन्न हुआ। अंजुमन की जानिब से तमाम शिरकत करने वालों और सहयोगियों का तहे-दिल से शुक्रिया अदा किया गया।

इस लंगर को कामयाब बनाने में हर मज़हब और हर तबक़े के लोगों ने अहम भूमिका निभाई। इस मौके पर राशिद अहमद (केबल वाले), अमजद अली ठेकेदार, सुहैल खान कैटरर्स, हैदर उर्फ़ आसिफ अली, साहिल मलिक, साकिब शहज़ाद, आदिल गौर, परवेज़ आलम, गौरव बंसल, रामपाल सिंह, बिलाल खान, मेहरबान अली, अनस गाज़ी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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