आरिफ नियाज़ी।
भगवानपुर।
एक ओर जिलाधिकारी हरिद्वार जनपद को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए दिन-रात प्रयासरत हैं और लगातार अधिकारियों को स्वच्छता के निर्देश दे रहे हैं जगह जगह हर कार्यक्रम में साफ सफाई रखने के लिए शपथ तक दिलाई जा रही है तो वहीं दूसरी ओर भगवानपुर कृषि मंडी में जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। मंडी परिसर में स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है, जिससे बाहर से आने वाले किसानों और व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कृषि मंडी में बनाए गए शौचालय पूरी तरह से बदहाल अवस्था में पहुंच चुके हैं। कोई भी शौचालय उपयोग के योग्य नहीं बचा हैं, वहीं इन स्थानों पर तो गंदगी का अंबार लगा हुआ है। आलम यह है कि शौचालयों में चारों ओर फैली गंदगी के कारण कीड़े चलते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिससे लोगों में संक्रामक बीमारियों के फैलने का डर भी सताने लगा है।
मंडी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में किसान और व्यापारी अपनी उपज लेकर पहुंचते हैं, लेकिन शौचालयों की ऐसी दयनीय स्थिति के कारण उन्हें खुले में जाने को मजबूर होना पड़ता है। इससे न केवल स्वच्छता अभियान को ठेस पहुंच रही है, बल्कि मंडी की छवि भी धूमिल हो रही है। मंडी में मात्र दो सफाई कर्मचारी तैनात हैं।
स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। यदि समय रहते स्वच्छता व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो किसी बड़ी बीमारी के फैलने से इनकार नहीं किया जा सकता।

इस संबंध में प्रभारी मंडी सचिव कुलदीप नौटियाल ने बताया कि शौचालयों की खराब स्थिति को देखते हुए नए शौचालय निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर कृषि मंडी के मुख्य कार्यालय, रुद्रपुर को भेज दिया गया है। अनुमति मिलते ही जल्द निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
अब देखना यह होगा कि उच्चाधिकारियों से कब तक अनुमति मिलती है और किसानों व व्यापारियों को इस गंभीर समस्या से कब राहत मिल पाती है।





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