आरिफ नियाज़ी।
उतराखण्ड पावर जूनियर इंजीनियर एसोसिएशन की हरिद्वार जिले की जिला कार्यकारिणी का चुनाव रूडकी में सम्पन्न हुआ जिसमें श्री आलोक चाहौन को जिला अध्यक्ष, प्रवीण कुमार को उपाध्यक्ष एवं वसीम अहमद को जिला सचिव चुना गया | संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया अमित रंचोला एवं विमल कुल्याल द्वारा सम्पंन कराईं गई I उक्त चुनाव में हरिद्वार जिले के UPCL एवं PTCUL के समस्त2%. अवर अभियंता संवर्ग के सदस्य सम्मलित रहे | नई कार्यकारिणी द्वारा उतराखण्ड पावर जूनियर इंजीनियर एसोसिएशन के दिनांक 28.05.25 से आरम्भ होने वाले आन्दोलन में सम्पूर्ण भगीदारी एवं सहयोग हेतु प्रतिज्ञा ली गयी | उक्त चुनाव में केंद्रीय अध्यक्ष रविंद्र सैनी . प्रांतीय अध्यक्ष सुनील उनियाल , प्रांतीय महासचिव राहुल अग्रवाल ,आजीवन संरक्षक आर०के०जैन,केन्द्रीय महासचीव नितिन तिवारी,प्रांतीय महासटीव युजेवीवन लिमिटेड विकास चौहान इत्यादि उपस्थित रहे | आज के इस कार्यक्रम का संपूर्ण सफल आयोजन सुनील कुमार द्वारा किया गया
शशिकांत द्वारा सभा की अध्यक्षता करते हुए कहा गया कि
वरिष्ठता विवाद में माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल के निर्णय के उपरांत उत्तराखण्ड पावर कॉरपोरेशन लि० की उक्त निर्णय आदेश पर स्पष्टीकरण अनुरोध याचिका पर स्पष्ट आदेश निर्गत करने के बाद माननीय उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित समयावधि बीतने के बाद भी निगम द्वारा सहायक अभियंता से अधिशासी अभियंता के पद पर पदोन्नति हेतु कोई भी कार्यवाही नहीं की गई है। बल्कि पदोन्नति प्रकरण को बेवजह लटकाने-उलझाने के कारण विगत 8-9 वर्षों से पदोन्नति की बाट जोह रहे सदस्यों में गहन असंतोष व्याप्त है। विदित हो कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त वाद की सुनवाई के दौरान निगम प्रबंधन की गलत कार्यशैली के कारण निगम प्रबंधन पर एक लाख का जुर्माना भी लगाया गया था, जो कि निगम प्रबंधन की हठधर्मिता और अन्याय को दर्शाता है। माननीय उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद निगम प्रबंधन द्वारा पदोन्नति कार्यवाही करने के बजाय शासन स्तर पर कमेटी बनवाना, यह दर्शाता है कि निगम प्रबंधन मामले के समाधान को लेकर क़तई गम्भीर नहीं है अन्यथा कोई भी कमेटी क्या माननीय न्यायालय से ऊपर हो सकती है? क्या निगम प्रबंधन प्रचलित नियमों का ईमानदारी से अनुपालन कर वरिष्ठता निर्धारित करने में सक्षम नहीं है? उत्तराखंड के मूल निवासी अवर अभियंता संवर्ग और प्रोन्नत अभियंताओं के साथ निगम प्रबंधन के लगातार अनदेखी और अन्यायपूर्ण रवैये ने एसोसिएशन को आन्दोलन का मार्ग अपनाने को विवश कर दिया है।
उपरोक्त कारणों से उत्तराखण्ड पावर जूनियर इंजीनियर्स एसोसिएशन कार्यकारिणी ने विवश होकर निगम प्रबंधन के अन्याय के विरोध में उग्र आंदोलन करने का निर्णय लिया है। जिला कार्यकारिणी पूर्ण मनोयोग के साथ एसोसिएशन के आंदोलन में प्रतिभाग करेगी।
सभी सदस्यों और पदाधिकारियों से अनुरोध है कि संवर्ग की अस्मिता और मान प्रतिष्ठा को बचाने के लिए, न्याय और अपना अधिकार प्राप्त करने के लिए अपरिहार्य उक्त आन्दोलन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपनी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। इस हेतु जन-जागरण अभियान चलाकर आन्दोलन कार्यक्रम का प्रचार प्रसार किया जाएगा।





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