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पूर्व पार्षद संजीव शर्मा की रूस और युक्रेन के युद्ध को लेकर ख़ास रिपोर्ट

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आरिफ नियाज़ी।
रूस और यूक्रेन युद्ध को चलते हुए लगभग चार साल का वक्त हो चुका है। यह युद्ध दिन प्रतिदिन भयानक होता जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान यह कहा था कि वो इस युद्ध को रुकवा सकते हैं। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप राजनीति की दोगली चाल चलते हैं एक तरफ वो कहते है कि वो सीज फायर करा देंगे वहीं दूसरी तरफ वह यूक्रेन को आर्थिक मदद और हथियार भेज देते है। अभी अभी जलस्की अमेरिका डोनाल्ड ट्रंप से मिलने गए थे जहां डोनाल्ड ट्रंप ने जलस्की को कह दिया कि वह रूस के अंदर जा कर युद्ध करने को स्वतंत्र है।और यह भी कहा अमरीका पूरी तरह से यूक्रेन के साथ हैं जलस्की भी समझ चुके हैं कि इस युद्ध को कोई भी नहीं रुकवा सकता है इसलिए वह भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रहे है कि शायद भारत यह युद्ध रुकवा सके लेकिन मैं यहां यह भी बताना चाहता हूं कि जब यूक्रेन अलग राष्ट्र बना था तो उसे मान्यता देने वाला पहला देश भारत था। लेकिन जब भारत ने पोखरन में परमाणु विस्फोट किया तो यूक्रेन ने भारत का विरोध किया। जिन देशों ने भारत पर आर्थिक प्रतिबन्ध लगाए तो यूक्रेन भारत के विरोध में उन देशों के साथ खड़ा दिखाई दिया। संयुक्त राष्ट्र में जब जब भारत को यूक्रेन के साथ की आवश्यकता पड़ी तब तब यूक्रेन ने भारत का विरोध किया और आज वह चाहता है कि मोदी जी पुतिन से बात करके यह युद्ध रकबा दे। यूक्रेन किस मुंह से भारत से यह आशा रखता है जेलस्की यूक्रेन में कॉमेडियन थे। कॉमेडियन होना और राजनीतिक होना दोनों अलग बात है। जेलस्की ने अपनी नासमझी से पूरे यूक्रेन को बर्बाद कर दिया। कुछ लोग यह सोचते होंगे कि इस युद्ध में पुतिन गलत हैं लेकिन मेरा मानना है कि पुतिन अपनी जगह बिल्कुल ठीक है क्योंकि पुतिन ने केवल यह चाहा कि यूक्रेन नाटो सेना में शामिल ना हो। क्योंकि यूक्रेन और रूस के बॉर्डर मिले हुए हैं। इसलिए पुतिन यह सोचते थे कि यदि यूक्रेन नाटो में शामिल हो गया तो हो सकता है कि अमरीका और नाटो देश रूस के बॉर्डर के समीप अपने सैनिक बेस बना लेंगे जिससे फ्यूचर में रूस को हानि हो सकती है। इसलिए पुतिन नहीं चाहते कि यूक्रेन नाटो में शामिल हो। हर देश को अपने देश की सुरक्षा के लिए चिंतित ओर सजग रहना चाहिए। इसलिए पुतिन इस तरह सोचते थे। लेकिन कॉमेडियन जेलस्की ने पुतिन की बात नहीं मानी। आज यूक्रेन भीख में मिले हथियारों से रूस को जीतना चाहते हैं। अमेरिका तो केवल अपने हथियार बेच रहा है जिससे उसकी इकोनोमी अच्छी हो जाए 2014 के बाद कुछ और अच्छा हुआ हो या ना हुआ हो लेकिन एक बात जरूर अच्छी हुई है कि मोदी जी ने हमारी तीनों सेनाओं को अत्याधुनिक हथियारों से मजबूत कर दिया है। कल ही हमने अग्निप्राइम मिसाइल का सफल परीक्षण किया है जिसकी रेंज 2000 km है। यह मिसाइल हम ट्रेन से भी लॉन्च कर सकते है। इस लिए भारत कुछ चुनिंदा देशों में आ चुका है जिसके पास यह टेक्नोलॉजी है। मैं इसके लिए अपने देश के वैज्ञानिकों को बधाई और शुभकामनाएं देना चाहता हूं जिन्होंने भारत के लिए यह उपलब्धि पैदा करी।

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