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मंगलौर में चकबंदी विभाग का बड़ा फर्जीवाड़ा, लखनऊ वक्फ बोर्ड में दर्ज करोड़ों की 30 बीघा जमीन ‘मुर्दे’ के नाम पर हथियाई, फर्जी आधार और वसीयत से हुआ खेल।

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आरिफ़ नियाज़ी।
मंगलौर क्षेत्र में चकबंदी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। चकबंदी पटवारी और एक उच्च अधिकारी की कथित मिलीभगत से लखनऊ यूपी वक्फ बोर्ड में दर्ज करोड़ों की बेशकीमती 30 बीघा आम के बाग की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के सहारे दो व्यक्तियों नें अपने नाम दर्ज करा दिया ल इस धोखाधड़ी की भनक लगते ही पीड़ित परिवार अब इंसाफ के लिए सरकारी दफ्तरों और अदालतों के चक्कर काटने को मजबूर है। फिलहाल यह पूरा मामला जिलाधिकारी के आदेश पर चकबंदी विभाग रूड़की में विचाराधीन है जिसके लिए जिलाधिकारी ने चकबंदी विभाग को विस्तृत जांच के सख्त निर्देश दिए हैं।
​​जानकारी के अनुसार, मंगलौर निवासी दिवंगत महबूब इलाही का करीब 30 बीघा बेशकीमती आम का बाग है, जो उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित वक्फ बोर्ड में बाकायदा दर्ज है। लगभग 1940 के दशक में महबूब इलाही अपने परिवार के साथ पाकिस्तान चले गए थे। उनके जाने के बाद इस संपत्ति की देखरेख उनके भाई मकबूल इलाही बतौर ‘मुतवल्ली’ (संरक्षक) कर रहे थे, जिनका नाम सभी सरकारी व कानूनी दस्तावेजों में दर्ज था।
​मकबूल इलाही के निधन के बाद उनके बेटे अहतशाम इलाही इस बाग का रखरखाव कर रहे थे। नियमानुसार अहतशाम इलाही को ही इस जमीन का नया मुतवल्ली नियुक्त किया जाना था और इस संपत्ति को उत्तराखंड वक्फ बोर्ड में भी दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही थी ​पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इसी दौरान मलानपुरा मंगलौर निवासी आबिद हुसैन पुत्र वाहिद, मलकपुरा निवासी मोहसिन पुत्र मकसूद और चकबंदी पटवारी ने आपस में सांठ-गांठ कर एक बड़ा षड्यंत्र रचा। वर्ष 2024 में आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार किए, जिसमें एक मृतक व्यक्ति ‘अब्दुल कय्यूम’ को ‘महबूब इलाही’ दर्शाते हुए फर्जी आधार कार्ड और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया गया। इसके आधार पर एक जाली वसीयत तैयार कराई गई और चकबंदी अधिकारियों के साथ साठ-गांठ कर करोड़ों की भूमि आबिद के नाम पर दर्ज करा दी गई।
​​जब पीड़ित परिवार को इस फर्जीवाड़े का पता चला, तो उन्होंने तत्काल चकबंदी विभाग रुड़की से संपर्क कर जमीन पर ‘स्टे’ (स्थगन आदेश) प्राप्त कर लिया। आरोप है कि इसके कुछ ही दिनों बाद शातिर आरोपियों ने मिलीभगत कर स्टे हटवा दिया और आनन-फानन में यह बेशकीमती जमीन ज्वालापुर निवासी निशा त्रिपाठी को बेच दी गई ।
​मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल लाइंस कोतवाली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक षड्यंत्र रचने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया था। वर्तमान में यह मामला रुड़की न्यायालय में भी विचाराधीन बताया जा रहा है।
​दूसरी ओर, मुख्य आरोपी आबिद और मोहसिन ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें निराधार और बेबुनियाद बताया है। उनका दावा है कि जमीन के हस्तांतरण में सभी विधिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।
​वहीं, इस हाई-प्रोफाइल मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने रुड़की चकबंदी विभाग को पूरी फाइल की गहनता से जांच करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद से चकबंदी विभाग के संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं फ़र्ज़ी आधार कार्ड और फ़र्ज़ी मृत्यु प्रमाण पत्र की जांच भी तेज़ हो गई है इसमें नगर पालिका मंगलोर के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच गतिमान है

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