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उत्तराखंड में ‘दावों’ तले सिसकता शिक्षा का ढांचा, भगवानपुर के सरठेड़ी स्कूल में ना शौचालय, ना पानी, जमीन पर गोबर का लगा अंबार।

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आरिफ नियाज़ी।

​उत्तराखंड सरकार राज्य के सरकारी स्कूलों को हाइटेक बनाने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के चाहे जितने भी बड़े दावे कर ले, लेकिन धरातल की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। हरिद्वार जिले के भगवानपुर विकासखंड के ग्राम सरठेड़ी स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की बदहाली इसका ज्वलंत उदाहरण है। प्रशासनिक उपेक्षा और विभागीय उदासीनता के कारण यह स्कूल मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। शिक्षा के मंदिर में अव्यवस्थाओं का अंबार लगा है।बाउंड्री वॉल गायब जिसके चलते स्कूल की जमीन पर अवैध कब्जा हो चुका है। हालांकि स्कूल की अपनी बाउंड्री वॉल ना होने का खामियाजा छात्रों और स्कूल प्रशासन को भुगतना पड़ रहा है। बाउंड्री ना होने से ग्रामीणों ने स्कूल की कीमती भूमि पर अतिक्रमण कर लिया है। हद तो तब हो गई जब स्कूल प्रांगण की जमीन का इस्तेमाल पशुओं का गोबर फेंकने और कूड़ा डालने के लिए किया जाने लगा है। इससे उठती दुर्गंध और मक्खी-मच्छरों के कारण बच्चों में गंभीर संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा मंडरा रहा है।
​डिजिटल इंडिया और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के दौर में इस स्कूल में छात्राओं के लिए शौचालय तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। गौरतलब है कि इस विद्यालय में छात्राओं की संख्या काफी अधिक है। इसके अलावा पीने के स्वच्छ पानी की भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे भीषण गर्मी और दैनिक दिनचर्या में बच्चों व शिक्षकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
स्कूल प्रबंधन और स्थानीय समिति ने इस बदहाली को दूर करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। विभागीय उच्च अधिकारियों से लेकर भगवानपुर एसडीएम तक को लिखित शिकायतें और ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन नतीजा शून्य रहा। हर बार जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से केवल खोखले आश्वासन ही मिले हैं, धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
वहीं ​शिक्षा विभाग की इस घोर अनदेखी से स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है। स्वच्छता और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में छात्राएं स्कूल छोड़ने को मजबूर हो सकती हैं।बड़ा सवाल यह है कि जब प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पानी, शौचालय और सुरक्षित परिसर जैसी बुनियादी जरूरतें ही पूरी नहीं हो पा रही हैं, तो उत्तराखंड का शिक्षा मॉडल किस दिशा में आगे बढ़ रहा है?
​स्थानीय निवासियों और स्कूल प्रबंधन ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द स्कूल की बाउंड्री वॉल का निर्माण कराकर अतिक्रमण हटाया जाए और पेयजल व शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

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