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कलियर शरीफ में शिक्षा की नई अलख, अल जमीअत और दायित्व फाउंडेशन ट्रस्ट प्रोजेक्ट बुनियाद के माध्यम से देंगे कक्षा 6, 7 और 8 के बच्चों को ‘निशुल्क कोचिंग

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आरिफ नियाज़ी।
​कलियर शरीफ।गरीब और निर्धन परिवारों के बच्चों के मुस्तकबिल (भविष्य) को संवारने के लिए जमीयत उलेमा-ए-हिंद बेहद संजीदा नजर आ रहा है। पिरान कलियर की रहमतपुर रोड स्थित शमीम साबरी कालोनी में जमीयत उलेमा-ए-हिंद और ‘दायित्व फाउंडेशन ट्रस्ट’ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए घोषणा की गई कि क्षेत्र के कक्षा 6, 7 और 8 के विद्यार्थियों के लिए निशुल्क (फ्री) कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी।

​इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों को मुख्यधारा में लाना है जो स्कूल तो जाते हैं, लेकिन घर लौटने के बाद सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण किताबों में दिलचस्पी नहीं लेते और अपना समय इधर-उधर घूमने में जाया कर देते हैं। संस्था का मानना है कि इन बच्चों को बेहतर माहौल देकर इनकी बुनियादी तालीम (Basic Education) को मजबूत किया जा सकता है।​बैठक में समाज के प्रबुद्ध और जिम्मेदार लोगों के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों ने भी शिरकत की।इस दौरानं अपने विभाग के ईमानदार अधिकारी माने जाने वाले और मुख्यमंत्री पुष्कर ​ सिंह धामी से सम्मानित होने वाले PCS अधिकारी डॉ. तंजीम अली ने कहा की ​”हमारा प्रयास है कि गरीब और निर्धन बच्चे भी समाज की मुख्य धारा से जुड़ें और अच्छी तालीम हासिल करें। जब तक बुनियादी तालीम बेहतर नहीं होगी, बच्चे आगे नहीं बढ़ पाएंगेउन्होंने कहा की ।हमारा प्रयास है कि गरीब और निर्धन बच्चे भी समाज की मुख्य धारा से जुड़ें और अच्छी तालीम हासिल करें। जब तक बुनियादी तालीम बेहतर नहीं होगी, बच्चे आगे नहीं बढ़ पाएंगे। आज वह समय आ गया है कि भले ही हम अपनी दूसरी जरूरतों को कम कर लें, लेकिन बच्चों को अच्छी तालीम जरूर दिलवाएं।”वहीं ​लोक निर्माण विभाग से सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता हाजी यूसुफ अली ने कहा:की आज मुस्लिम समाज पढ़ाई के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, लेकिन अभी और अधिक जागरूक होने की जरूरत है। जब तक बच्चे दीनी तालीम के साथ-साथ दुनियावी तालीम हासिल नहीं करेंगे, तब तक वे समाज की मुख्य धारा से बिछड़ते रहेंगे। आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का है, ऐसे तकनीकी समय में बच्चों का उच्च शिक्षित होना बेहद आवश्यक है।” आज मुस्लिम समाज पढ़ाई के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, लेकिन अभी और अधिक जागरूक होने की जरूरत है। जब तक बच्चे दीनी तालीम के साथ-साथ दुनियावी तालीम हासिल नहीं करेंगे, तब तक वे समाज की मुख्य धारा से बिछड़ते रहेंगे। आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का है, ऐसे तकनीकी समय में बच्चों का उच्च शिक्षित होना बेहद आवश्यक है।​बैठक में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मुफ्ती तौसीफ साहब और मौलाना शराफत ने बेहद बेबाकी से अपनी बात रखते हुए कहा कि आज के समय में तालीम से बढ़कर कुछ नहीं है। कलियर स्थित जमीयत के कार्यालय में ही यह निशुल्क कोचिंग सेंटर चलाया जाएगा। इसके लिए जमीयत के कार्यकर्ता और उलेमा-ए-इकराम आसपास के गांवों का दौरा करेंगे, बच्चों को सेंटर तक लाएंगे और साथ ही उनके अभिभावकों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए काउंसलिंग भी करेंगे।​देहरादून से पहुंचे जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रवक्ता शाह नजर अली, जिन्होंने कार्यक्रम का सफल संचालन भी किया, उन्होंने कहा की
कलियर में शुरू किया जा रहा यह प्रोजेक्ट मील का पत्थर साबित होगा। जो परिवार आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों को ट्यूशन नहीं पढ़ा पा रहे हैं, वे बिना किसी संकोच के अपने बच्चों को जमीयत के कार्यालय भेजें ताकि उनके बच्चों का भविष्य संवर सके।​शिक्षा के इस बड़े अभियान को अमलीजामा पहनाने के लिए आयोजित हुई इस बैठक में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश कोषाध्यक्ष कारी मुबशिर, जमीयत के अध्यक्ष अब्दुल वाहिद, प्रदेश उपाध्यक्ष हाजी शमीम साबरी, नगर पंचायत कलियर के पूर्व चेयरमैन शफ़क्कत अली, मास्टर सलमान, और मौलाना इरशाद सहित क्षेत्र के कई गणमान्य लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे और सभी ने इस मुहिम को हर संभव सहयोग देने का संकल्प लिया।

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