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मंगलौर में सियासी घमासान,राष्ट्रीय सचिव काजी निजामुद्दीन से टकराए जिलाध्यक्ष मारगूब कुरैशी, क्या पड़ेगा भारी।

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आरिफ नियाज़ी।

मंगलौर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी के भीतर का अंदरूनी कलह अब खुलकर सड़कों पर आ गया है। कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के जिलाध्यक्ष मारगूब कुरैशी ने पार्टी के कद्दावर नेता, मंगलौर विधायक और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के राष्ट्रीय सचिव काजी निजामुद्दीन के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। मरगूब कुरैशी के इस बगावती रुख ने जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक की कांग्रेस की राजनीति में हलचल मचा दी है।
​राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि कांग्रेस के इतने बड़े कद के नेता से सीधे टकराना मारगूब कुरैशी को भारी पड़ सकता है, और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।कांग्रेस ​अल्पसंख्यक विभाग के जिलाध्यक्ष मारगूब कुरैशी ने विधायक काजी निजामुद्दीन पर बेहद तीखे और गंभीर आरोप लगाए हैं।
​ मारगूब का सीधा आरोप है कि काजी निजामुद्दीन धरातल पर रात-दिन काम करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सम्मान देना नहीं जानते।
​ उन्होंने विधायक पर क्षेत्र और कार्यकर्ताओं के प्रति लापरवाही बरतने के भी आरोप लगाए हैं। अब मारगूब कुरैशी के इन आरोपों में कितनी सच्चाई है और कितना राजनीतिक स्वार्थ है यह तो आने वाला वक्त ही साफ करेगा। लेकिन फिलहाल इन आरोपों ने मंगलौर कांग्रेस में अंदरूनी दरार को जगजाहिर कर दिया है।गौरतलब है की काज़ी निजामुद्दीन राहुल गांधी के बेहद करीबी और विश्वसनीय माने जाते है विधायक ​काजी निजामुद्दीन के खिलाफ मोर्चा खोलना मारगूब कुरैशी के लिए गले की फांस भी बन सकता है, काजी सिर्फ मंगलौर के विधायक ही नहीं हैं, बल्कि कांग्रेस के राष्ट्रीय ढांचे में एक मजबूत स्तंभ भी हैं। काजी निजामुद्दीन कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव हैं और कई राज्यों के संगठनात्मक मामलों में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।उन्हें कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता है। ऐसे में दिल्ली दरबार तक मजबूत पकड़ रखने वाले नेता से पंगा लेना मारगूब के सियासी भविष्य के लिए बड़ा जोखिम साबित हो सकता है।​अगर मारगूब कुरैशी के राजनीतिक सफर पर नजर डालें, तो वह लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं, लेकिन उनका राजनीतिक ट्रैक रिकॉर्ड उतार-चढ़ाव से भरा रहा है।मारगूब कुरैशी बीच- में कांग्रेस को झटका देकर हाजी खेमे में भी जाकर बसपा का दामन थामते रहे हैं, जिससे उनकी निष्ठा पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
​ इस बार के उपचुनाव में वह कांग्रेस में बने रहे और उन्होंने काजी निजामुद्दीन का साथ दिया। लेकिन जैसे ही काजी निजामुद्दीन ने मंगलौर उपचुनाव में जीत दर्ज की, उसके बाद से ही दोनों नेताओं के बीच सब कुछ ठीक नहीं रहा। दोनों के बीच की यह खटास अब इस हद तक बढ़ चुकी है कि मारगूब कुरैशी को काजी के खिलाफ खुलकर मैदान में आना पड़ा और उन्होंने विधायक के खिलाफ आरोपों की झड़ी लगा दी।
​मंगलौर कांग्रेस की यह अंदरूनी जंग अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहने वाली है। एक तरफ जहां मारगूब कुरैशी कार्यकर्ताओं के आत्मसम्मान की लड़ाई का दावा कर रहे हैं तों वहीं दूसरी तरफ काजी निजामुद्दीन का खेमा इसे अनुशासनहीनता के तौर पर देख रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व इस अंदरूनी कलह को कैसे शांत करता है, या फिर मारगूब कुरैशी पर कार्रवाई कर काजी निजामुद्दीन के दबदबे को बरकरार रखता है

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