आरिफ नियाज़ी।
रुड़की। एक ओर जहाँ पूरा देश भीषण गर्मी और गिरते जलस्तर से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण के ‘फेफड़े ‘ कहे जाने वाले हरे-भरे पेड़ों पर बेखौफ कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। ताज़ा मामला रुड़की के प्रतिष्ठित कन्हैया लाल डी.ए.वी. इंटर कॉलेज का है, जहाँ रात के सन्नाटे में कई विशालकाय और छायादार पेड़ों को काटकर ठिकाने लगा दिया गया।
मिली जानकारी के अनुसार, कॉलेज परिसर में खड़े पुराने और हरे-भरे पेड़ों को बड़ी ही चालाकी से रात के वक्त काटा गया। सुबह जब स्थानीय लोगों और संबंधित पक्षों को इसकी भनक लगी, तो मौके से पेड़ गायब थे। हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी कार्रवाई की सूचना किसी को नहीं दी गई और गुपचुप तरीके से साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश की गई। इस संवेदनशील मामले पर जब कॉलेज के प्रिंसिपल सुरेश कुमार राय से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने बार-बार फोन किए जाने के बावजूद कॉल रिसीव नहीं किया। कॉलेज प्रशासन की यह रहस्यमयी चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है:
बड़ा सवाल यह है की क्या पेड़ों को काटने के लिए वन विभाग से अनुमति ली गई थी?
भीषण गर्मी के मौसम में छायादार पेड़ों को काटने की क्या मजबूरी थी?
यदि प्रक्रिया कानूनी थी, तो कार्य को रात के अंधेरे में क्यों अंजाम दिया गया?
मामले की गंभीरता को देखते हुए जागरूक नागरिकों द्वारा इसकी सूचना वन विभाग को दे दी गई है। जानकारों का कहना है कि यदि बिना प्रबंधन की लिखित सहमति और सरकारी अनुमति के पेड़ काटे गए हैं, तो यह पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का सीधा उल्लंघन है
रुड़की का यह कॉलेज पहले भी कई मामलों को लेकर सुर्खियों में रहा है। लेकिन इस बार सीधे तौर पर प्रकृति के साथ हुई इस छेड़छाड़ ने शहर के पर्यावरण प्रेमियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।





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