आरिफ नियाज़ी।
आज जब पूरी दुनिया में करबला के शहीदों की याद में ग़म और अकीदत का माहौल है, वहीं उत्तराखंड के भगवानपुर क्षेत्र के खेड़ीशिकोहपुर गांव में भी मोहर्रम के मौके पर खास धार्मिक आयोजन किए गए। यहां ताज़ियों के साथ अखाड़े और लंगर का आयोजन कर इमाम हुसैन की शहादत को याद किया गया।
गांव की गलियों में निकाले गए ताज़ियों के साथ अंजुमनों ने नौहे और मातमी कलाम पेश कर करबला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। जगह-जगह अखाड़े हुए तो वहीं नौजवानों ने ताजिये उठाकर बहादुरी और अनुशासन का संदेश भी दिया। वहीं, लंगर-ए-हुसैनी का आयोजन कर लोगों को तबर्रुक और सेवाएं वितरित की गईं।
ग्रामीणों ने बताया कि यह दिन न सिर्फ ग़म का है, बल्कि सब्र, सच्चाई और इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल को याद करने का भी है। ताज़ियादारी के इस मौके पर गांव के हर तबके के लोग शामिल हुए और इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद कर इंसाफ, अमन और भाईचारे की दुआएं मांगीं।
“मोहर्रम सिर्फ मातम नहीं, बल्कि एक पैग़ाम है—जुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने का, इंसानियत के लिए जीने का। और यही पैग़ाम आज खेड़ीशिकोहपुर में हर गली से सुनाई दे रहा था।” हज़रत इमाम हुसैन हक़ पर थे और उन्होंने हक़ और सच्चाई पर रहते हुए अपने परिवार की करबला में कुर्बानी दी!जब तक दुनिया रहेगी इमाम हुसैन का गम मनाती रहेगी!





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