आरिफ नियाजी।
सीएसआईआर–सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई), रुड़की द्वारा आयोजित ‘उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र की कम लागत वाली निर्माण तकनीकों’ पर केंद्रित पांच दिवसीय कार्यशाला का समापन शुक्रवार को ग्रामीण प्रौद्योगिकी पार्क, सीएसआईआर-सीबीआरआई परिसर में हुआ। यह कार्यशाला 23 जून से प्रारंभ हुई थी, जिसमें विभिन्न अभियंता, वास्तुविद, शोधकर्ता और तकनीकी पेशेवर शामिल हुए। इसमें ऐसे निर्माण तरीकों पर चर्चा की गई जो स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल हों। प्रस्तुतियों और प्रायोगिक सत्रों के माध्यम से पारंपरिक हिमालयी तकनीकों को आधुनिक निर्माण विधियों के साथ जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया। समापन सत्र में कार्यशाला के प्रमुख बिंदुओं की संक्षिप्त समीक्षा की गई। वक्ताओं ने ऐसे निर्माण समाधान अपनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया जो स्थानीय आवश्यकताओं के अनुकूल हों और प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर सके, विशेषकर ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में। इस अवसर पर सीबीआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कानूंगो ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि वैज्ञानिक शोध और पारंपरिक ज्ञान को मिलाकर निर्माण क्षेत्र की कई समस्याओं का हल निकाला जा सकता है। उन्होंने बताया कि संस्थान ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोगी तकनीकों के विकास के लिए कार्य करता रहेगा। इसके पूर्व प्रमाण पत्र वितरित किए गए। प्रतिभागियों को डॉ.कानूंगो , डॉ.ताबिश आलम, आर्किटेक्ट अनुप कुमार प्रसाद, और डॉ.नवीन निशांत द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन डॉ.ताबिश आलम द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी वक्ताओं, आयोजकों और उपस्थितजनों का सहयोग के लिए आभार प्रकट किया। यह कार्यशाला निर्माण तकनीकों की समझ और अनुभव साझा करने का अवसर बनी, जिससे क्षेत्र विशेष की आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान तैयार करने में सहयोग मिल सकता है।





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