आरिफ़ नियाज़ी
रुड़की की सिंचाई विभाग में अंग्रेज़ो के समय की बनी उधोगशाला की चिमनी का रास्ता एक रहस्य बनकर रह गया है आलम यह है कि अधिकारियों के लिए इस चिमनी का रास्ता तलाशना बेहद मुश्किल हो रहा है हालांकि अधिकारियों ने इस चिमनी का रास्ता तलाशने के लिए बाहर से ड्रोन कैमरों की मदद भी ली है लेकिन कोई सफलता नहीं मिली है। इस चिमनी के ऊपरी हिस्से में दरारें आने लगी हैं हालांकि अधिकारियों का दावा है कि फिलहाल चिमनी को कोई खतरा नहीं है।
वहीं इस बाबत उधोगशाला के अधिशासी अभियंता शिशिर गुप्ता ने बताया कि उधोगशाला को और भी बेहतर बनाने का काम चल रहा है जगह जगह लगे कूड़े के ढेर से भी निजात मिलेगी।चारो ओर साफ सफाई अभियान चलाया गया है।साफ सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही उधोगशाला में सुरंग और चिमनी के बारे में भी जानकारी ली जा रही है।
गौरतलब है की 1842 में अंग्रेजों ने रुड़की और कलियर गंगनहर के निर्माण के समय इस उधोगशाला का निर्माण कराया था जिसमें बेशकीमती मशीनो के साथ साथ सुरंगे भी बनाई गई थी । इस उधोगशाला मे उत्तराखंड के कई पुलों और बैराज का सामान भी इसी उधोगशाला में तैयार हुआ था। उत्तरप्रदेश के समय मे इस उधोगशाला मे काफी कार्य था लेकिन उत्तराखंड बनने के बाद किसी भी सरकार का ध्यान इस उधोगशाला पर नहीं गया और यह उधोगशाला बंदी के कगार पर पहुंच गई है।
लेकिन अब अधीक्षण अभियंता संजीव कुशवाहा और अधिशासी अभियंता शिशिर गुप्ता के प्रयासों से इस उधोगशाला के दिन और अच्छे आने वाले हैं सब कुछ ठीक ठाक रहा तो कुछ दिन बाद यह उधोगशाला रुड़की में यह एक ऐतिहासिक धरोहर के रूप में मानी जाती है जो सबसे बड़े क्षेत्रफल में फैली हुई है। लगभग 90 फीट लंबी चिमनी का रास्ता उधोगशाला केअधिकारियों को दूर दूर भी कहीं नजर नही आ रहा है ।वहीं अधिशासी अभियंता शिशिर गुप्ता कहना है कि उधोगशाला जल्द ही नए लुक में नज़र आएगी।

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