आरिफ़ नियाज़ी
रुड़की सिंचाई विभाग की राजकीय सिंचाई उद्योगशाला जल्द ही अब नए लुक में नजर आएगी। इसके लिए विभागीय अधिकारियों ने कोशिशें तेज कर दी है ।उद्योगशाला के कायाकल्प के लिए कर्मचारियों को भी जिम्मेदारी दे दी गई हैं। उधोगशाला में जगह जगह लगे कूड़े के ढेर और गंदगी से तो निजात मिलेगी ही साथ ही उधोगशाला का पूरा इतिहास भी देखने को मिलेगा। खास बात यह है कि देश और प्रदेश के विकास में उधोगशाला का क्या योगदान रहा है इसका भी पूरा रिकॉर्ड उधोगशाला में मौजूद रहेगा।
गौरतलब है कि रुड़की गंगनहर किनारे बनी अंग्रेज़ो के समय की यह राजकीय सिंचाई उधोगशाला आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है उधोगशाला में चारों ओर गंदगी और कूड़े के ढेर लगे हैं जिससे उधोगशाला का तमाम स्टाफ भी बेहद परेशान है लेकिन अब ऐसा नहीं रहेगा सब कुछ ठीक ठाक रहा तो नलकूप मंडल रुड़की के अधीक्षण अभियंता संजय कुशवाहा और उधोगशाला के अधिशासी अभियन्ता शिशिर गुप्ता के प्रयासों से बहुत कुछ बदला हुआ नजर आएगा।
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गौरतलब है कि सिंचाई विभाग की उधोगशाला का निर्माण रुड़की से गुजरने वाली गंगनहर के निर्माण के समय हुआ था अंग्रेज़ी वैज्ञानिक सर प्रोबे कोटले ने सबसे पहले इस उधोगशाला का निर्माण कराया था। उधोगशाला का उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश व अन्य प्रदेशों के बड़े बड़े डैम और बैराज बनाने में अहम योगदान रहा है। लेकिन पिछले कुछ समय से यह उधोगशाला बदहाल बनी हुई है काम ना मिलने की वजह से हालात और भी खराब हुए हैं।
दोनों अधिकारियों के आने से इस सिंचाई उद्योग शाला में कई जगहों के कार्य लाकर उनको बड़ी तेजी से कराये जा रहे हैं। इस उद्योगशाला में बडी़ बडी़ मशीनें पर अनुभवी कारीगर काम करते हैं। उद्योगशाला द्वारा विश्व प्रसिद्ध बी.एच.ई.एल.जैसे महत्वपूर्ण संस्थान की गैस टर्वाइनो के कार्य सफलता पूर्वक किये गए हैं जिसके लिए इस उद्योग शाला को प्रशंसा पत्र भी मिले हैं। परन्तु इस उद्योग शाला की बिल्डिंग अत्यंत जर्जर अवस्था में है किसी भी समय कोई गम्भीर हादसा हो सकता है। आज अधिशासी अभियंता शिशिर गुप्ता ने उधोगशाला का बारीकी से निरीक्षण किया तथा इस पर ध्यान दिया इसकी मरम्मत कार्य को लेकर सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिये साथ ही उन्होंने लंबे समय से बंद पड़ी मशीनों को भी अपने सामने चलवाकर देखा। उधोगशाला में साफ सफाई रखने के भी कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए।
उन्होंने उधोगशाला में पिछले लंबे समय से बंद पड़ी मशीनों को भी दुरुस्त रखने के निर्देश दिए ।इस दौरान शिशिर गुप्ता ने बताया कि अब उत्तराखण्ड की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण उधोगशाला का कायाकल्प अधीक्षण अभियंता नलकूप मण्डल, रुड़की संजय कुशवाहा व अन्य उच्चाधिकारियों के सहयोग से किया जाएगा ताकि बाहर से आने वाले लोग भी इसे देखकर बेहद प्रभावित हों। उन्होंने बताया कि उधोगशाला के तमाम रिकॉर्ड को भी इकठठा किया जा रहा है । तमाम तरह के डैम और बैराज बनाने में इस उधोगशाला का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है।अब जल्द ही नए लुक में उधोगशाला नज़र आएगी।शिशिर गुप्ता ने उधोगशाला का बारीकी से निरीक्षण किया इस दौरान उधोगशाला के कनिष्ठ अभियंता व कई सम्बंधित अनुभवी कर्मचारी मौजूद रहे।

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