आरिफ़ नियाज़ी
रूड़की उप शिक्षा अधिकारी द्वारा कार्यमुक्त किये जाने पर भी शिक्षक ने अपने मूल विद्यालय में कार्यभार ग्रहण नहीँ किया है।
गौरबतलब है कि रुड़की महापौर गौरव गोयल ने जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर नगर निगम क्षेत्र में बंद पड़े प्राथमिक विद्यालयों को पुनः खोलने हेतु पत्र लिखा था जिस पर डी ईओ विद्याशंकर चतुर्वेदी ने बंद पड़े विद्यालयों को खोलने हेतु उप शिक्षा अधिकारी रुड़की को आदेशित किया था। उप शिक्षा अधिकारी रुड़की सुबोध मलिक द्वारा प्राथमिक विद्यालय नम्बर 7 में मेहवड कला प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक कृष्णगोपाल शर्मा ओर प्राथमिक विद्यालय हथियाथल के सहायक अध्यापक राजीव कुमार शर्मा को व्यवस्था के रूप में भेजा था।
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प्राथमिक विद्यालय पनियाला प्रथम की सहायक अध्यापक सरस्वती पुंडीर को रुड़की नम्बर 6 विद्यालय में भेजा गया था। परंतु तत्कालीन उप शिक्षा अधिकारी रुड़की सुबोध मलिक द्वारा अपने ही आदेश को तीन दिन बाद वापस लेकर तीनों शिक्षकों को उनके मूल विद्यालय हेतु आदेशित किया गया था।
गौरतलब है कि पिछले चार पाँच वर्षों से सरकार द्वारा बच्चों को निशुल्क दी जाने वाली पाठ्य पुस्तकों का वितरण बंद किया हुआ है वर्तमान में प्रदेश सरकार किताबो का पैसा डी बी टी के माध्यम से सीधे बच्चों के खाते में डाल रही है लेकिन एक शिक्षक कृष्ण गोपाल शर्मा जो कि राजीकीय प्राथमिक विद्यालय मेहवड कला में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत है

पिछले 10 -12 वर्ष से लगातार प्राथमिक विद्यालय नम्बर 7 में विभाग द्वारा निशुल्क पाठ्य पुस्तकों में अटैच है। जबकि निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का कार्य अब शून्य है लेकिन गुरु जी अभी भी अपने मूल प्राथमिक विद्यालय मेहवड कला में बच्चों को ना पढ़ाकर पुस्तको की रखवाली कर रहे है। इस बारे में उप शिक्षा अधिकारी रुड़की कुंदन सिंह से वार्ता की गई उन्होंने बताया कि स्कूल संचालन हेतु शिक्षकों की शीघ्र व्यवस्था की जा रही है ताकि नव प्रवेशित बच्चों को लाभ मिल सकें
हालांकि गुरुजी के मुताबिक वह आधे समय स्कूल और आधे समय में पुस्तकों का कार्य देखते हैं संस्कृत और उर्दू की किताबो के लिए अक्सर लोग आते रहते हैं। हालांकि बड़ी बात ये है कि शासन की तरफ से किसी भी शिक्षक का अटैचमेंट नियमविरुद्ध है वर्तमान में अटैचमेंट बिल्कुल भी सही नही है।



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