आरिफ नियाज़ी।
भारत सरकार के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘डिजिटल जनगणना’ को लेकर हरिद्वार जिले में प्रशासन पूरी गंभीरता से जुटा है, लेकिन मंगलौर क्षेत्र से आई एक खबर ने इस पूरी प्रक्रिया की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहाँ एक ओर सरकार पेपरलेस गणना की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है जिन्हें स्मार्टफोन तक चलाना नहीं आता। तकनीक के आगे बेबस चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सिंचाई खंड रुड़की के हैँ जिनमें चार मेट मांघेराम, चंद्रपाल, सुनील कुमार और गोविंद—को मंगलौर क्षेत्र में भवन सर्वे के लिए प्रगणक बनाया गया है। समस्या यह है कि ये सभी कर्मचारी कक्षा पांचवीं और आठवीं पास हैं। इन कर्मचारियों का कहना है की
उन्हें स्मार्टफोन और कंप्यूटर का बिल्कुल भी ज्ञान नहीं है।
उनके पास ऐसे मोबाइल फोन तक नहीं हैं, जिनमें जनगणना के लिए निर्धारित ‘ऐप’ डाउनलोड किया जा सके।
आयु अधिक होने और तकनीकी अनुभव ना होने के कारण वह इस महत्वपूर्ण सर्वे को करने में पूरी तरह असमर्थ हैं।
पीड़ित कर्मचारियों ने अपनी व्यथा सबसे पहले नगर पालिका मंगलौर के अधिशासी अधिकारी उत्तम सिंह नेगी के समक्ष रखी, लेकिन वहाँ सुनवाई न होने पर उन्होंने राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल को ज्ञापन सौंपकर मदद की गुहार लगाई। कर्मचारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि, “साहब! हमें स्मार्टफोन चलाना नहीं आता, हम यह सर्वे कैसे करेंगे? हमें हमारे मूल विभाग में वापस भेज दिया जाए।”
राज्य मंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों से वार्ता कर समाधान का आश्वासन दिया है।
इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनगणना जैसे संवेदनशील और तकनीकी कार्य के लिए कर्मचारियों का चयन करते समय उनकी योग्यता और तकनीकी दक्षता को क्यों नजरअंदाज किया गया?
मामला बढ़ता देख अब सिंचाई खंड के अधिशासी अभियंता श्री उनियाल ने 21 अप्रैल को मंगलौर नगर पालिका परिषद के जनगणना प्रभारी को पत्र लिखकर इन चारों कर्मचारियों को ड्यूटी से मुक्त करने का अनुरोध किया है। पत्र में स्पष्ट तौर पर उनकी अधिक आयु और स्मार्टफोन की जानकारी ना होने को आधार बनाया गया है।
डिजिटल इंडिया के दौर में इस तरह की चूक ना केवल कर्मचारियों के लिए मानसिक प्रताड़ना है, बल्कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण डेटा के साथ भी एक बड़ा जोखिम है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन कर्मचारियों को हटाकर किसे यह जिम्मेदारी सौंपता है और मंगलौर में चारों के प्रशिक्षण लेने के बाद जनगणना की गति कैसे आगे बढ़ती है।





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