आरिफ नियाज़ी।
भगवानपुर
एक ओर उत्तराखंड सरकार द्वारा सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जनता की समस्याओं का तत्काल और प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए, वहीं दूसरी ओर कुछ विभाग ऐसे भी हैं जो इन निर्देशों को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं। खाद्य पूर्ति विभाग की स्थिति भगवानपुर में बेहद चिंताजनक बनी है।
खाद्य पूर्ति विभाग में वर्तमान समय में मात्र दो कर्मचारी तैनात हैं। सीमित स्टाफ होने के कारण जब भी विभागीय बैठक, बहुउद्देशीय शिविर या अन्य शासकीय कार्यक्रमों में कर्मचारी शामिल होने जाते हैं, तो विभागीय कार्यालय में ताला लगा दिया जाता है। इसका सीधा असर दूर-दराज के गांवों और देहात से आने वाले लोगों पर पड़ रहा है, जिन्हें अपने जरूरी कार्यों के लिए घंटों इंतजार करने के बाद निराश होकर लौटना पड़ता है।

राशन कार्ड, यूनिट जोड़ने या कटवाने, नाम संशोधन, ई-केवाईसी सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए आने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार तो लोग लंबी दूरी तय कर कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन ताला देखकर उन्हें मायूस होकर वापस लौटना पड़ता है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि विभागीय अधिकारियों को इस समस्या की कोई विशेष चिंता नहीं दिखाई दे रही है। न तो अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की कोई व्यवस्था की गई है और न ही जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कोई वैकल्पिक समाधान अपनाया जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि खाद्य पूर्ति विभाग में शीघ्र अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती की जाए, ताकि कार्यालय नियमित रूप से खुला रहे और आम जनता को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सके। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो जनता का विश्वास प्रशासन से उठने लगना स्वाभाविक है।





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