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राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बिझोली के अध्यापक पर्यावरण के बने प्रहरी, डॉक्टरेट एवार्ड से किया गया सम्मानित – लगाए 50 हज़ार से अधिक पौधे

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आरिफ नियाज़ी।

शिक्षक ना केवल समाज के भविष्य को गढ़ते हैं, बल्कि जब वही शिक्षक जब पर्यावरण को संवारने का बीड़ा उठाएं, तो वह समाज के असली नायक बन जाते हैं। आज हम बात कर रहे हैं राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बिझोली के एक ऐसे सरकारी स्कूल के शिक्षक की, जो शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी अपने जीवन का मिशन बना चुके हैं।
जी हाँ बिझोली क्षेत्र के सरकारी स्कूल में कार्यरत शिक्षक अशोक पाल ने वह कर दिखाया है, जो बड़े-बड़े अभियान में कोई नहीं कर पाया। समाज सेवा और हरियाली को बढ़ावा देने की भावना से प्रेरित होकर, गुरुजी ने खुद के खर्चे पर अभी तक पचास हज़ार से अधिक पौधे लगवा चुके हैं। इनमें फलदार और छायादार दोनों प्रकार के पेड़ शामिल हैं।

शिक्षक अशोक पाल का मानना है कि जिस धरती ने हमें जीवन दिया है, उसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। वे अपने छात्रों को भी वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करते हैं और अक्सर स्कूल में पर्यावरण संरक्षण पर विशेष सत्र आयोजित करते है!
उन्होंने बताया की मैं चाहता हूँ कि अगली पीढ़ी को शुद्ध हवा, हरा वातावरण और एक सुंदर पृथ्वी मिले। यही मेरा सपना है और इसे साकार करना मेरी सबसे बड़ी जिम्मेदारी।

गांव-गांव जाकर, सार्वजनिक स्थानों, गंगनहर किनारे, स्कूल परिसरों, सड़कों के किनारे और बंजर ज़मीनों पर पेड़ लगवाकर यह शिक्षक ना केवल हरियाली फैला रहे हैं, बल्कि लोगों को भी जागरूक कर रहे हैं।

वाकई, यह शिक्षक समाज के लिए प्रेरणा हैं। ऐसे लोग ही सच्चे अर्थों में गुरु कहलाने के हक़दार हैं, जो ना केवल ज्ञान का दीप जलाते हैं, बल्कि पर्यावरण रूपी धरोहर को भी अगली पीढ़ी के लिए संजोकर रखते है!

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