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बुग्गावाला के घाड़ क्षेत्र में जंगली हाथियों का तांडव, फसलें तबाह, किसानों के आंसू देख भड़के राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल, वन विभाग को लगाई कड़ी फटकार

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आरिफ़ नियाज़ी।
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बुग्गावाला के घाड़ क्षेत्र के आसपास के इलाकों में जंगली जानवरों, खासकर हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन गजराज का दल खेतों में घुसकर गरीब व छोटे किसानों की लहलहाती फसलों को मिनटों में रौंदकर बर्बाद कर रहा है। हाल ही में हाथियों के झुंड ने क्षेत्र के कई छोटे किसानों की पूरी फसल तबाह कर दी, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।​फसलों के विनाश की सूचना मिलते ही पूर्व राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल तुरंत धरातल पर स्थिति का जायजा लेने पहुंचे। उन्होंने पीड़ित घाड़ क्षेत्र के ग्रामीणों और किसानों को एकत्र कर उनकी समस्याओं को प्रमुखता से सुना। किसानों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि वन विभाग की बेरुखी और लापरवाही के कारण उनकी रातों की नींद और दिन का चैन हराम हो चुका है। राज्य मंत्री के ​​निरीक्षण के दौरान उस समय स्थिति बेहद भावुक हो गई जब राजेश कश्यप नाम का एक स्थानीय किसान राज्य मंत्री के सामने ही फूट-फूटकर रोने लगा। किसान ने रोते हुए अपना दुखड़ा सुनाया कि हाथियों ने उसकी मेहनत से उगाई गई गन्ने की पूरी फसल को उजाड़कर रख दिया है। पीड़ित किसान ने कहा की ​”जंगली जानवरों ने हमारा जीना दुश्वार कर दिया है। हमारी रोजी-रोटी का एकमात्र जरिया ये फसलें थीं, जिन्हें जानवरों ने नष्ट कर दिया। वन विभाग के अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं और हमारी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है।”
​​किसानों का दर्द देखने के बाद राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल तुरंत पास स्थित वन विभाग की चौकी पर पहुंचे। वहाँ तैनात वनकर्मियों से जब उन्होंने हाथियों के रोकथाम और गश्त को लेकर सवाल पूछे, तो कोई भी कर्मचारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। वनकर्मी ना तो आक्रोशित किसानों को आश्वस्त कर पाए और ना ही राज्य मंत्री के प्रश्नों का उत्तर दे सके।
​कर्मचारियों की इस घोर लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को देख राज्य मंत्री का पारा चढ़ गया और उन्होंने वन विभाग के कर्मचारियों को मौके पर ही जमकर फटकार लगा ई l​मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल ने तुरंत डीएफओ से मोबाइल पर वार्ता की और क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, सोलर फेंसिंग (तारबांदी) दुरुस्त करने तथा पीड़ित किसानों को तत्काल उचित मुआवजा दिलाने के कड़े निर्देश दिए।
​वहीं दूसरी ओर, वन विभाग की लगातार अनदेखी से आक्रोशित दर्जनों पीड़ित किसान वन विभाग की चौकी के बाहर ही धरने पर बैठ गए। किसानों की मांग है कि जब तक उन्हें नष्ट हुई फसलों का उचित मुआवजा नहीं मिलता और हाथियों से सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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