आरिफ नियाज़ी
उत्तराखंड में सरकारी कामकाज पर बड़ा असर पड़ सकता है। डिप्लोमा इंजीनियरों ने अपनी मांगों को लेकर आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है। हालांकि पहले ही दिन डिप्लोमा इंजिनियर्स की शासन से वार्ता विफल रही शासन से मांगो पर आज कोई सहमति नहीं बनी अगर डिप्लोमा इंजिनियर्स अधिक समय पर आंदोलन पर रहते हैँ तो इसका प्रभाव कुम्भ कार्यो पर अधिक पड़ सकता है।
गौरतलब है की उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के प्रांतीय कार्यकारिणी के आह्वान पर प्रदेशभर के इंजीनियर हड़ताल पर बैठ गए हैं। रुड़की स्थित सिंचाई विभाग कार्यालय में बड़ी संख्या में कर्मचारी इकट्ठा हुए और धरना प्रदर्शन किया। इंजीनियरों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी 27 सूत्रीय मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई।
जिला अध्यक्ष अमूल वालिया ने कहा कि 24 फरवरी को देहरादून में रैली निकालकर हमने मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया था।
मुख्यमंत्री ने मांगों को जायज माना था लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। शासन स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी के चलते मजबूरी में अब इंजीनियरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता चुना है। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं।हड़ताल जारी रहेगी।
संघ की प्रमुख मांगों में वेतन विसंगतियों का समाधान,पदोन्नति,समान वेतनमान और पेयजल विभाग का एकीकरण शामिल है। वहीं इस आंदोलन को और मजबूती तब मिली जब पर्वतीय कर्मचारी-शिक्षक संगठन ने भी हड़ताल को अपना समर्थन दे दिया।
अब देखना होगा कि सरकार इस हड़ताल पर क्या रुख अपनाती है क्योंकि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेश में विकास कार्यों पर बड़ा असर पड़ सकता है।इस अवसर पर उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के जिलाध्यक्ष अमूल वालिया, स्वाति गुप्ता पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्ष ललित मोहन जोशी ने चेतावनी दी है की अगर सरकार ने उनकी मांगो पर गंभीरता से विचार ना किया तो बड़े पैमाने पर आंदोलन होगा।





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