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मुल्क संविधान से चलता है, डरने की ज़रूरत नहीं: मौलाना नसीम अहमद कासमी

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आरिफ नियाज़ी

​रुड़की। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला उपाध्यक्ष मौलाना नसीम अहमद कासमी ने वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक हालातों पर बेबाकी से अपनी राय रखी है। रुड़की के एक निजी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में मुस्लिम समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।

मौलाना ने विशेष रूप से उत्तराखंड का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह बुजुर्गों दरवेशो के मज़ारों को निशाना बनाया गया और अरबी मदरसों को बंद किया गया, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे समाज के एक वर्ग को हाशिए पर धकेलने की कोशिश बताया।

​ उन्होंने जोर देकर कहा की “यह देश किसी विचारधारा से नहीं बल्कि संविधान से चलता है।” उन्होंने मुसलमानों से अपील करते हुए कहा वे हौसला न हारें और संविधान के दायरे में रहकर देश व प्रदेश की तरक्की में बढ़-चढ़कर अपना योगदान दें।
​मौलाना ने रमजान के पवित्र महीने का जिक्र करते हुए कहा कि इफ्तार पार्टियों का आयोजन केवल इबादत नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे को बढ़ाने का जरिया भी है।

उन्होंने ‘ईद मिलन’ और ‘होली मिलन’ जैसे साझा कार्यक्रमों पर जोर दिया ताकि समाज में मोहब्बत और सौहार्द बना रहे।
​उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा कि सरकार को अपनी ही पार्टी के नारे ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। विकास के वादे धरातल पर तभी दिखेंगे जब समाज का हर तबका खुद को सुरक्षित महसूस करेगा।

​”मुसलमानों को डरने की नहीं, बल्कि हिम्मत और सलीके के साथ मुल्क की प्रगति में हाथ बंटाने की जरूरत है। हमारी ताकत हमारा संविधान और हमारा आपसी भाईचारा है।

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