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मंगलौर में सैयद अली हैदर ज़ैदी के आवास पर देर रात तक चलती रही मुशायरे की महफिल, सांसद इकरा हसन का हुआ ज़ोरदार स्वागत, शायर ताहिर फराज़, खुर्शीद हैदर और डॉ बिलाल सहारनपुरी आदि ने एक से बढकर एक कलाम पेश किये पेश

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आरिफ नियाज़ी।
मंगलौर में प्रमुख समाजसेवी अली हैदर के आवास पर देर रात तक चले मुशायरे में शायरों ने अपने कलाम पर जमकर वाहवाही लूटी।

वहीं देर से पहुंची कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने बड़ी बेबाकी के साथ कहा की आज देश में नफरतों का ज़हर घोला जा रहा है कुछ लोग देश की गंगा जमुनी तहज़ीब को ख़राब करना चाहते है लेकिन मुशायरों और कवि सम्मेलनों ने हमेशा ही मोहब्बत और आपसी सौहार्द का पैगाम दिया है उन्होंने कहा की मुशायरे आज आपसी भाईचारा और सौहार्द बढ़ाने का काम कर रहे हैं जगह जगह मुशायरे आयोजित होने से उर्दू भाषा के प्रति लोगों की रूचि बढ़ी है यही कारण है की मुशायरे में हिंदु कवि भी अपनी रचनाओं से रूबरू कराते है साहित्य से हमें बहुत कुछ सीखने और समझने का मौका मिलता है।

इकरा हसन ने बड़े बेबाक अंदाज़ में कहा की सैयद अली हैदर ज़ैदी,सैयद कौसर ज़ैदी के परिवार से उनका बहुत पुराना नाता है सभी लोग परिवार के सुख दुख में हमेशा पहुँचते हैं ज़ैदी परिवार ने हमेशा ही समाज को प्यार मोहब्बत का पैगाम दिया है वह जहाँ भी रहते हैं वहां लोगों की खिदमत को बेहतर तरीके से अंजाम देते रहे हैं मंगलौर में भी उन्होंने लोगों के दिलों में जगह बनाई है।मुशायरे में मशहूर और मारुफ शायर ताहिर फराज़ रामपुरी, मुज़फ्फरनगर से खुर्शीद हैदर, बिलाल सहारनपुरी और मुकेश दर्पण जैसे शायरों ने एक से बढकर एक कलाम पेश किये और अपने कलाम से श्रोताओं को देर रात तक बैठने को मजबूर कर दिया। मुशायरे में मंगलौर और आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। देवबन्द से पहुंचे युवा शायर डॉ नदीम शाद देवबन्दी ने अपना कलाम पेश करते हुए कहा की
हमारे सामने अब तक जो यूँ खड़े हैं आप,
लिहाज़ यह है की उम्र में बड़े हैं आप।
मुशायरे में देहरादून से पहुंची शायरा मोनिका मंतशा ने अपने कलाम से श्रोताओं का दिल जीत लिया उन्होंने कहा की
जिंदगी ज़िंदान होती जा रही है,
मौत का सामान होती जा रही है।
खुशबूयें कम हो रहीं हैं गुलिस्तां में,और फ़िज़ा वीरान होती जा रही है। इस शेर पर मोनिका मंतशा ने श्रोताओं की जमकर वाहवाही लूटी उन्होंने कहा की
ना सितारे फूल जुगनू ना आफ़ताब आए,
तेरी मुन्तज़ीर हैं आँखे इन्हे तेरा खुवाब आए।
मशहूर शायर खुर्शीद हैदर ने इस मुशायरे में जहाँ एक से बढकर एक कलाम पेश किये वहीं उन्होंने पंडाल में बैठे श्रोताओं की फरमाईश का भी पूरा ध्यान रखा उन्होंने अपने कलाम को शुरू करते हुए कहा की
गैर परों पर उड़ सकते हैं हद से हद दीवारों तक,
अम्बर पर वहीं उड़ेंगे,जिनके अपने पर होंगे।

मुशायरे में रामपुर से पहुंचे मशहूर शायर ताहिर फराज़ ने श्रोताओं को सुबह सवेरे तक पंडाल में बैठने पर मजबूर कर दिया उन्होंने ने भी कई कलाम पेश किये उन्होंने कहा की
इतना भी करम उनका कोई कम तो नहीं है,
गम देके वो पूछे हैं कोई गम तो नहीं है। मुशायरे की महफिल को आगे बढ़ाते हुए शायर सलीम बलरामपुरी ने कहा की
फिर अदालत का तमाशा होगा, आज अदालत में सुनवाई है। काज़िम रिजवी ने अपने कलाम को कुछ इस तरह से पेश किया
उसके सियाह नैन की जाकर नज़र उतार,
मारे हसद के चूर हुई सुरमेदानियां। इसी बीच सहरनपुर से पहुंचे युवा शायर डॉ बिलाल सहारनपुरी ने पंडाल में बैठे श्रोताओं की जमकर वाहवाही लूटी इस दौरान उन्होंने अपना कलाम पढ़ते हुए कहा की

रिक्शा चलाने वाले ने बच्चे पढ़ा लिए,
जो थे नवाबज़ादे नज़ाक़त में मर गए। शायर डॉ अमजद अज़ीम सहारनपुरी ने अपना कलाम पेश करते हुए कहा कीहमारे साथ में रहते तो संदल हो गए होते,अगर लहजा बदल लेते तो मुकम्मल हो गए होते। मुशायरे का आगाज़ अकील नोमानी की नात ए पाक से हुआ जबकि मुशायरे की निज़ामत कर रहे अंसार ज़ैदी कैरानवी ने भी अपने कलाम से जमकर श्रोताओं की जमकर वाहवाही लूटी उन्होंने कहा की
इस बात से किसी को ना इनकार होना चाहिए,
हर बशर को साहिबे किरदार होना चाहिए।
वहीं मुशायरे के कनवीनर कौसर ज़ैदी ने कहा की
अजब हमदर्दीयां करके ताल्लुक से हुई पैदा,
सुना है अब मेरे आंसू तेरी आँखों से बहते हैं। शायर उस्मान उस्मानी कैरानवी ने कहा की
हम जब भी मिले जिससे मिले दिल से मिले,
हम लोग दिखावे की मोहब्बत नहीं करते।
देहरादून से शायर अमजद खान अमजद ने अपना कलाम पेश करते हुए कहा की चलना मुश्किल कर देती है मुफलिसी,
खाली जेब भी कितनी भारी होती है। बरेली से पहुंचे शायर अकील नोमानी ने अपना कलाम पेश करते हुए कहा की
प्यास के ज़िक्र को रखता हूं जुदा पानी से,
देखते रहते हैं दरिया मुझे हैरानी से। मुजफ्फरपुर से पहुंचे डॉ मुकेश दर्पण ने इस शेर पर पंडाल में बैठे लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया उन्होंने कहा की
कम से कम इतना तो मेरे यार होना चाहिए,
नफरतों में भी ज़रा सा प्यार होना चाहिए,
नफरतें खुद ही अपना सर पटक कर रोयेंगी,
तुझपे बस किरदार का हथियार होना चाहिए सुबह सवेरे तक चले मुशायरे की सदारत प्रो तनवीर चिश्ती ने की उन्होंने भी मंगलौर कस्बे को मिले अली हैदर ज़ैदी के परिवार के योगदान को विस्तार से बताया और अपने कलाम भी पेश किये.इस मौक़े पर सैयद कौसर अली ज़ैदी, सैयद अली हैदर ज़ैदी,सैयद यावर अली ज़ैदी,सैयद रईस हैदर ज़ैदी,सैयद शबी हैदर ज़ैदी, समाजसेवी कुंवर जावेद,मोंटी अंसारी, ज़ुल्फकार अंसारी, पूर्व राज्य मंत्री अमीर हसन अंसारी, कांग्रेस नेता राव आफाक, ए आई एम एम आई एम के प्रदेश अध्यक्ष डॉ नैयर काज़मी,खलील चेयरमैन, अमजद उस्मानी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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