आरिफ़ नियाज़ी।
भगवानपुर के सभागार में राजस्व परिषद उत्तराखंड द्वारा एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य के चार निकायों में भूमि संपत्तियों के डिजिटलीकरण को प्रोत्साहित करना था। इस अवसर पर नक्शा (National Mapping and Surveying Hub for Administration) के तहत विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई, जिसमें भूमि रिकॉर्ड की ऑनलाइन उपलब्धता और विवाद समाधान प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया गया।
राजस्व परिषद उत्तराखंड एवं सर्वे आफ इंडिया द्वाराद्वारा तहसील भगवानपुर में दो दिवसीय आयोजित इस पायलट अध्ययन कार्यक्रम में, स्टाफ और अधिकारियों को भूमि के डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया, आवश्यक तकनीकी उपायों और विवाद निवारण की विधियों से अवगत कराया गया। इस परियोजना का उद्देश्य भूमि संबंधित विवादों को कम करना और एक क्लिक पर भूमि के सभी दस्तावेज़ों तक पहुँच प्राप्त करना है।

इस कार्यक्रम में सभी संबंधित निकायों और अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और डिजिटलीकरण प्रक्रिया के महत्व को समझा। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्यक्रम भूमि प्रशासन में पारदर्शिता और गति लाने में सहायक सिद्ध होगा, साथ ही जनता को अधिक सुविधा प्रदान करेगा।
**विशेष बातें:**
* भूमि संपत्तियों का डिजिटलीकरण: डिजिटलीकरण से भूमि रिकॉर्ड को आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।
* विवाद समाधान: भूमि विवादों का समाधान तेजी से किया जाएगा, जिससे न्यायपालिका पर बोझ कम होगा।
* प्रशासनिक सुधार: प्रशिक्षण से अधिकारियों को बेहतर तरीके से डिजिटलीकरण कार्य में संलग्न होने की क्षमता मिलेगी।
राजस्व परिषद ने बताया कि इस पायलट परियोजना के बाद इसे अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा, जिससे सम्पत्ति विवादों को न्यूनतम किया जा सके और सरकार की योजना को साकार किया जा सके।इस अवसर पर ब्लॉक और तहसील के सभी अधिकारी मौजूद रहे।





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