आरिफ नियाज़ी।
भगवानपुर के खेड़ीशिकोहपुर गांव में हजरत अब्बास अलमदार को याद करते हुए आज़ादारो ने गांव में बड़ी संख्या मे अलम निकाले।इस दौरान जगह जगह लंगर के इंतजाम भी किए गए थे!अलम ले जा रहे लोग हजरत इमाम हुसैन की शहादत के मरसिए पढ़ रहे थे। गौरतलब है कि मोहर्रम की दस तारीख को करबला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन शहीद हुए थे।इमाम हुसैन हक पर थे और इस्लाम बचाने के लिए उन्होंने अपने 72 परिवार वालों को दीन के लिए कुर्बान कर दिया। पूरी दुनिया में इस माह में हजरत इमाम हुसैन को याद किया जाता है। हजरत इमाम हुसैन हक पर थे इसलिए उन्होंने यजीद की बात को स्वीकार नहीं किया और जंग लड़ते हुए करबला में शहीद हो गए। यजीद की फौज ने करबला में शहीद होने वाले परिवारों पर बहुत अधिक जुल्म ढाए लेकिन इमाम हुसैन अपनी बात पर कायम रहे और हक और सच का रास्ता चुनकर अपनी शहादत पेश कीलिए आज पूरी दुनिया हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद कर रही है! जगह जगह मजलिस हो रही है!





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