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रुड़की में अंजुमन इरतक़ा ए अदब द्वारा आयोजित मुशायरे में पहुंचे देश के प्रसिद्ध शायर,देर रात तक चले मुशायरे में शायरों ने बांधे रखा समां

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आरिफ नियाज़ी

रुड़की में अंजुमन इरतका ए अदब संस्था द्वारा मशहूर शायर नदीम फर्रूख के सम्मान में एक ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया जिसमें देश के प्रसिद्ध शायरों के अलावा श्रोता भी बड़ी संख्या में पहुंचे।इस दौरान रात भर श्रोता बाहर से आए शायरों से एक से बढ़कर एक कलाम सुनते रहे। मुशायरे का शुभारंभ पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किया।मुशायरे की अध्यक्षता प्रमुख समाज सेवी मुजीब मलिक द्वारा की गई इस मौके पर कुंवर जावेद इकबाल, राव आफाक,वीरेंद्र रावत , पूर्व राज्य मंत्री मोहम्मद अयाज़,सचिन गुप्ता, कांग्रेस नेता ईश्वरलाल शास्त्री,मरगूब कुरैशी, आदिल फरीदी प्रमुख रूप से शामिल रहे।रुड़की के नेहरू स्टेडियम में आयोजित

मुशायरे में नदीम फर्रुख को शहंशाहे निजामत का अवार्ड भी दिया गया उनका पगड़ी और शाल से सम्मान किया गया।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि आपसी भाईचारा और हिंदू मुस्लिम एकता के प्रति यह एक सफल आयोजन है जिसके लिए मैं संस्था के अध्यक्ष सैयद सना उल हक़ और महासचिव अंतर्राष्ट्रीय शायर सिकंदर हयात गड़बड़ के साथ उनकी पूरी अंजुमन इरतक़ा ए अदब को मुबारकबाद पेश करता हूं और मुशायरा के सरपरस्त सचिन गुप्ता का भी धन्यवाद व्यक्त करता हूं जिनकी कोशिशें से यह इतना बड़ा कार्यक्रम संपन्न हुआ साथ ही रुड़की के लोगों का भी आभार प्रकट करता हूं की उन्होंने बड़ी संख्या में पहुंचकर बाहर से आए शायरों की हौंसला अफजाई की। हरीश रावत ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से समाज में आपसी भाईचारे और सौहार्द को बढ़ावा मिलता है समय समय पर इस तरह के कार्यक्रम आयोजित होते रहने चाहिएं।मुशायरे का आगाज मशहूर शायरा शबीना अदीब ने गीत प्रस्तुत करते हुए देश भक्ति का गीत सुनाते हुए कहा कि

मेरे वतन के जैसा कोई वतन नहीं है,

यह चांद से भी प्यारा तारों से भी हंसी है, देवबंद से पहुंचे डॉक्टर नवाज़ देवबंदी ने भी अपने बेहतरीन लबो लहजे में एक से बढ़कर एक कलाम पेश किए उन्होंने कहा कि

जिन पर लुटा चुका था मैं दुनिया की दौलतें,

उन वारिसों ने मुझको कफन नाप कर दिया।जैसे ही मुशायरे के मंच पर भोपाल से आए

मंजर भोपाली का नाम मुशायरे के नाजिम ने मंच से लिया तो श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका जोरदार स्वागत किया उन्होंने अपने खास तरन्नुम में ख़ास पैगाम यू दिया कि

तमाम उम्र लड़ाई लड़ो उसूलों की,

जी सको तो जियो जिंदगी रसूल की,

मालेगांव मुंबई से पहुंचे अल्ताफ जिया ने भी अपना दिल निकाल कर रख दिया उन्होंने फरमाया

बुलंदी पर पहुंचने की हवस भी खूब होती है,

जिन्हें उड़ाना नहीं आता वो पर फैलाने लगते हैं,

मिशन गोपालपुरी ने भी अपने बेहतरीन तरन्नुम में गजले सुना कर लोगों को दाट देने पर मजबूर कर दिया उन्होंने कहा

चंद लम्हे वो गुज़र आया हूं अनजाने के साथ

जी नहीं लगता मेरा अब जाने पहचानो के साथ

युवा शायर हाशिम फिरोजाबादी ने भी एक से बढ़कर एक कलाम पेश किया उन्होंने कहा

तुम्हारा हमसे बिछड़ना तो एक बहाना था

मोहब्बतें में यह नुकसान तो उठाना था

अंतर्राष्ट्रीय हास्य व्यंग के शायर सिकंदर हयात गड़बड़ ने भी लोगों को कहकहे लगाने पर मजबूर कर दिया उन्होने कहा

अल्लाह का करम है मैं पत्नी के साथ हूं

उसे पर यह इत्तेफाक है अपनी के साथ हूं

सभा बलरामपुरी ने भी अपनी अपनी सुरीली आवाज में कई गजलें पेश की

पुर अमन जिंदगी की हिमायत किया करो

नफरत बुरी बला है मोहब्बत किया करो

खुर्शीद हैदर ने भी लोगों को आईना दिखाते हुए कहा कि

गैर परों पर उड़ सकते हैं हद के हद दीवारों तक

अम्बर पर तो वही उड़ेंगे जिनके अपने पर होंगे

इनके अलावा साहिल माधोपुरी, हसनैन दिलकश, बिलाल सहारनपुरी आदि ने भी अपना कलाम पेश कर ख़ूब वाह वाही लूटी

निजामत में शहंशाह ए नाजिम नदीम फर्रुक ने अपने लफ़्ज़ों की माला में आख़िर तक बांधे रखा

अंत में मुशायरे के कनवीनर चांद खान और अध्यक्ष सैयद सनाउल हक ने सभी बाहर से आए लोगों का दिल की गहराईयों से आभार प्रकट किया।

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