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शम्मून के बयान पर भड़के उलेमा, कहा ना जाने कितने शमून आए और चले गए, कारी शमीम ने कहा संस्कृत और वेद को पढ़ाना मुमकिन ही नहीं

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आरिफ नियाज़ी

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष के अरबी मदरसों में वेद और संस्कृत पढ़ाए जाने के ऐलान से प्रदेश के उलेमाओं में भारी गुस्सा है उन्होंने साफ कर दिया है की इस तरह का कोई भी आदेश उन्हें स्वीकार नहीं होगा। लाठरदेवा अरबी मदरसे आयोजित एक बैठक में मदरसे के नाजिम कारी शमीम ने साफ कर दिया की इस तरह के निर्णय का आलीमेदीन कड़ा विरोध करेगा।

उन्होंने कहा की मदरसों की जांच से वह घबराने वाले या डरने वाले नहीं है। कारी शमीम ने कहा की मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष वेद और संस्कृत को ना देखें बल्कि अरबी मदरसों की जगह अपने सरकारी स्कूलों को सुधार लें तो बड़ी बात होगी। उन्होंने कहा की मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष को अपनी सरकार में सरकारी स्कूलों की बदहाली को दूर करना चाहिए आज भी सरकारी स्कूलों के हालात बेहद बदतर हैं जहां शौचालय तक नहीं हैं जिसे सरकार को गंभीरता से देखना चाहिए। उन्होंने कहा की मुसलमानों की तालीम को मिटने नहीं दी जायेगा।

उन्होंने कहा की ऐसे शमून ना जाने कितने आए और कितने चले गए। मुगल सल्तनत से अंग्रेजों ने जब मुल्क छीना तो उन्होंने भी मुसलमानों को मिटाने की कोशिश की थी इसलिए उन्होंने भी मदरसों की तालीम खत्म करने की साजिश रची थी लेकिन सफलता नहीं मिली थी । उन्होंने कहा की अरबी मदरसों के वक्फ करने का कोई ओचित्य ही नहीं है पहले वक्फ बोर्ड को अपनी संपत्ति को गंभीरता से देखना चाहिए उन्हें मदरसों की चिंता नहीं करनी चाहिए मदरसों को उन्हें अपने हाल पर छोड़ देना चाहिए।

इस दौरान जमीयत उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना नसीम कासमी ने साफ किया की सरकार के पास कोई मुद्दा नहीं है 2024 की तैयारी को लेकर इस तरह के बयान जारी किए जा रहे हैं जिन्हे किसी कीमत पर भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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