आरिफ़ नियाज़ी
रुड़की के सुनहरा स्थित शहीद स्मारक पर मूर्ति लगाने और वहां पर अवैध अतिक्रमण के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है आर्य समाज ने इसकी शिकायत जॉइंट मजिस्ट्रेट से लेकर नगर निगम के अधिकारियों से की है। फिलहाल जॉइंट मजिस्ट्रेट अपूर्वा पांडेय ने पूरे मामले की जानकारी नगर निगम के अधिकारियों से मांगी है। गौरतलब है कि बीती 26 जुलाई को शहीद स्थल पर कुछ लोगों द्वारा शिवलिंग स्थापित कर दिया गया था जिसे लेकर दो पक्षों में जमकर हंगामा हुआ था एक पक्ष ने इसकी शिमायत पुलिस से भी की थी।वहीं आर्य समाज के लोगों ने इस पर गहरी आपत्ति जताई थी ।हाल ही में आर्य समाज के प्रधान हरपाल सिंह सैनी मंत्री जौहर लाल आर्य और आर्य समाज के संरक्षक चौधरी राजेंद्र सिंह ने इसकी शिकायत सभी अधिकारियों से की है।

उनका आरोप है कि रुड़की सुनहरा स्थित हरिद्वार का ही नहीं बल्कि पूरे उत्तराखंड का एक ऐतिहासिक शहीद स्मारक है क्योंकि इस वट वृक्ष पर देश को आजाद कराने वाले सैकड़ों क्रांतिकारियों को फांसी पर लटकाया गया था जिन्हें आज भी देश के लोग याद करते हैं। हरपाल सिंह सैनी ने बताया कि आर्य समाज इस स्थान पर 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस,15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस, 23 मार्च को शहीदी दिवस,10 मई को प्रथम क्रांति दिवस, 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, 9 अगस्त को अंग्रेज भारत छोड़ो दिवस के अलावा आर्य समाज का वार्षिकोत्सव जिला सभा एवं आर्य प्रतिनिधि सभा आदि कार्यक्रम क्षेत्र के गणमान्य लोगों की मौजूदगी में हमेशा आयोजित करता है लेकिन बड़ा दुर्भाग्य है कि कुछ लोग अपनी राजनीति के लिए शहीद स्थल की पहचान मिटाने की कोशिश कर रहे हैं।
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प्रधान हरपाल सैनी ने बताया कि पार्षद पति और कुछ अन्य लोग क्षेत्र में धार्मिक भावनाओं को बढ़काकर शहीद स्थल पर मूर्ति स्थापित करना चाहते हैं जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जबकि देवी देवताओं की मूर्ति को मंदिरों में या अपने घरों में भी लगाया जा सकता है लेकिन शहीद स्थल पर मूर्ति नहीं लगने दी जाएगी।हरपाल सिंह सैनी ने बताया कि शहीदी स्मारक के समीकरण के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा भारी भरकम बजट आवंटित किया गया था जिसमें लोहे का गेट और लोहे की ग्रिल आदि थी इस सामान को भी कुछ लोगों ने खुर्द खुर्द कर दिया है।
आर्य समाज के संरक्षक चौधरी राजेन्द्र सिंह ने कहा कि कुछ लोग धार्मिक लोगों की भावनाओं को भड़का कर आर्य समय समाज के खिलाफ करने का प्रयास कर रहे हैं ।आर्य समाज किसी भी धर्म किसी भी जाति का विरोध नहीं करता है बल्कि इस व्रक्ष पर सैकड़ों क्रांतिकारियों को फांसी पर चढ़ाया गया था यह शहीद स्मारक स्थल संपूर्ण राष्ट्र भक्तों की भावनाओं से जुड़ा है ।इस स्थान का नाम किसी अन्य देवताओं के नाम से रख कर उन शहीदों एवं इस वट वृक्ष की पहचान के लिए बहुत बड़ा अन्याय होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि शहीद स्मारक की पहचान को बनाए रखने के लिए आर्य समाज हमेशा संघर्ष करता रहेगा। गौरतलब है कि क्षेत्रीय पार्षद और उनके पति शहीद स्थल पर शिव की मूर्ति स्थापित करना चाहते हैं जबकि आर्य समाज इसका कड़ा विरोध कर रहा है।हालांकि मामला पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों तक भी पहुंच चुका है। फिलहाल पार्षद पति ने पुलिस को कुछ लोगों पर जाति सूचक शब्द और गाली गलौच करने का आरोप लगाया है।पुलिस फिलहाल इस मामले की जांच करने में जुटी है ।



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