आरिफ नियाज़ी।
कलियर शरीफ में हज़रत सिद्रतुल आरफीन मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक (रह.) के सालाना उर्स-ए-मुबारक के मुक़द्दस मौक़े पर दरगाह हज़रत अब्दुल कुद्दुस गंगोह शरीफ के सज्जादानशीन शाह मेहताब कुद्दूसी साबरी उर्फ़ ‘गुड्डु मियां’ के आवास पर एक अज़ीम-उश-शान और रूहानी नातिया नशिस्त का आयोजन किया गया। देर रात तक चली इस महफ़िल में दूर दूर से आए शायरों और ख़ास ओ आम ने पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम, साबिर पाक और अहले-बैत की शान में एक से बढ़कर एक कलाम पेश कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
महफ़िल की सरपरस्ती
सदारत शाह मेहताब कुद्दूसी साबरी उर्फ़ गुड्डु मियां सज्जादानशीन, दरगाह हज़रत अब्दुल कुद्दुस गंगोह शरीफ और
निज़ामत अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर अफ़ज़ल मंगलौरी द्वारा क़ी गई. दरगाह गंगोह शरीफ के नायब सज्जादानशीन मखदूम मियां द्वारा मेहमानों और जायरीनों के लिए बेहद उम्दा इंतज़ामात किए गए थे ।
नशिस्त की आध्यात्मिक शुरुआत पत्रकार सैयद नफ़ीसुल हसन की नात-ए-पाक से हुई। उन्होंने पढ़ा:
”आक़ा मदीने वाले तैबा मुझे बुला लो,
अरमान मेरे दिल के अब तुम ही निकालो…”
साबिर पाक दरगाह के नायब सज्जादानशीन शाह यावर मियां साबरी ने अपना कलाम पेश कर श्रोताओं की जमकर वाहवाही लूटी,उन्होंने पढ़ा
”मुबारक आमना को मुस्तफ़ा की आमद-आमद है,
बशर की गोद में नूरे-ख़ुदा की आमद-आमद है…”
इसके साथ ही उन्होंने हज़रत बीबी फ़ातिमा (रज़ियाल्लाहु अन्हा) की मन्क़बत में भी कलाम पेश कर महफ़िल में समां बांध दिया.अंतरराष्ट्रीय शायर अफ़ज़ल मंगलौरी ने अपने खास साबरी अंदाज़ से मुशायरे में चार चांद लगा दिए। उनके शेर पर पूरा मज़मा झूम उठा:
”ठोकरों में दरे-साबिर पड़ा रहने दो,
इनके सदके में मुक़द्दर तो बना रहने दो…
हो मुबारक तुम्हें दुनिया की बहारें लोगो,
मेरे हिस्से में ये गूलर की हवा रहने दो…
मैं हूँ साबिर का गदा और गदा भी अफ़ज़ल,
उससे पूछो मेरा नाम-पता रहने दो…”
सदारत फरमा रहे शाह मेहताब कुद्दूसी साबरी (गुड्डु मियां) ने जब शहीदाने-करबला की याद में कलाम पढ़ा, तो महफ़िल में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं उन्होंने पढ़ा
”करबला ख़ूने-शहनशाहे-हुदा मांगे है,
दीने-हक़ ख़ूने-हुसैनी से ज़िया मांगे है…
अकबरो, क़ासिमो, अब्बास-ए-दिलावर का लहू,
हुरमुला हज़रते-अस्ग़र का लहू मांगे है…
हाय करबल में रही सकीना बीबी,
और कुबरा वहाँ क़ासिम सा बना मांगे है…
बख़्श दे नाना की उम्मत को ऐ रब्बे-करीम,
ये दुआ इब्ने-अली शेरे-ख़ुदा मांगे है…”
इस साबरी नशिस्त में धार्मिक और राजनीतिक हस्तियों की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। दरगाह साबिर पाक के सज्जादानशीन शाह मंज़र ऐज़ाज़ साबरी उर्फ़ अली शाह मियां का फूल-माला पहनाकर भव्य स्वागत किया गया।वहीं
मुफ़्ती शमून क़ासमी पूर्व चेयरमैन, उत्तराखंड मदरसा बोर्ड
अनीस गौड़ प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा,
अनीस कस्सार वरिष्ठ भाजपा नेता,
महफ़िल का समापन देर रात मुल्क में अमन, चैन, भाईचारे और तरक्की की दुआ के साथ हुआ। देश के कोने-कोने से पहुंचे जायरीनों और अक़ीदतमंदों ने इस साबरी महफ़िल का भरपूर रूहानी आनंदकलियर शरीफ: हज़रत साबिर पाक के सालाना उर्स पर रूहानी नातिया मुशायरे की नूरानी महफ़िल, शायरों ने बिखेरे आक़ा और साबिर पाक की शान में कलाम
कलियर शरीफ में हज़रत सिद्रतुल आरफीन मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक (रह.) के सालाना उर्स-ए-मुबारक के मुक़द्दस मौक़े पर दरगाह हज़रत अब्दुल कुद्दुस गंगोह शरीफ के सज्जादानशीन शाह मेहताब कुद्दूसी साबरी उर्फ़ ‘गुड्डु मियां’ के आवास पर एक अज़ीम-उश-शान और रूहानी नातिया मुशायरे का आयोजन किया गया। देर रात तक चली इस महफ़िल में देश-विदेश से आए शायरों और ख़ास ओ आम ने पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम, साबिर पाक और अहले-बैत की शान में एक से बढ़कर एक कलाम पेश कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
महफ़िल की सरपरस्ती और संचालन
सदारत (अध्यक्षता): शाह मेहताब कुद्दूसी साबरी उर्फ़ गुड्डु मियां (सज्जादानशीन, दरगाह हज़रत अब्दुल कुद्दुस गंगोह शरीफ)।
संचालन (निज़ामत): अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर अफ़ज़ल मंगलौरी।
विशिष्ट व्यवस्था: दरगाह गंगोह शरीफ के नायब सज्जादानशीन मखदूम मियां द्वारा मेहमानों और जायरीनों के लिए बेहद उम्दा इंतज़ामात किए गए।
नातिया कलाम और ख़ास प्रस्तुतियां
आगाज़: मुशायरे की आध्यात्मिक शुरुआत पत्रकार सैयद नफ़ीसुल हसन की नात-ए-पाक से हुई। उन्होंने पढ़ा:
”आक़ा मदीने वाले तैबा मुझे बुला लो,
अरमान मेरे दिल के अब तुम ही निकालो…”
नायब सज्जादानशीन का कलाम: साबिर पाक दरगाह के नायब सज्जादानशीन शाह यावर मियां साबरी ने अपनी सुरीली आवाज़ में कलाम पेश कर श्रोताओं की जमकर वाहवाही लूटी:
”मुबारक आमना को मुस्तफ़ा की आमद-आमद है,
बशर की गोद में नूरे-ख़ुदा की आमद-आमद है…”
इसके साथ ही उन्होंने हज़रत बीबी फ़ातिमा (रज़ियाल्लाहु अन्हा) की मन्क़बत में भी कलाम पेश कर महफ़िल में समां बांध दिया।
अफ़ज़ल मंगलौरी का मक़बूल कलाम: अंतरराष्ट्रीय शायर अफ़ज़ल मंगलौरी ने अपने खास साबरी अंदाज़ से मुशायरे में चार चांद लगा दिए। उनके शेर पर पूरा मज़मा झूम उठा:
”ठोकरों में दरे-साबिर पड़ा रहने दो,
इनके सदके में मुक़द्दर तो बना रहने दो…
हो मुबारक तुम्हें दुनिया की बहारें लोगो,
मेरे हिस्से में ये गूलर की हवा रहने दो…
मैं हूँ साबिर का गदा और गदा भी अफ़ज़ल,
उससे पूछो मेरा नाम-पता रहने दो…”
करबला की याद और गुड्डु मियां की प्रस्तुति: सदारत फरमा रहे शाह मेहताब कुद्दूसी साबरी (गुड्डु मियां) ने जब शहीदाने-करबला की याद में कलाम पढ़ा, तो महफ़िल में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं:
”करबला ख़ूने-शहनशाहे-हुदा मांगे है,
दीने-हक़ ख़ूने-हुसैनी से ज़िया मांगे है…
अकबरो, क़ासिमो, अब्बास-ए-दिलावर का लहू,
हुरमुला हज़रते-अस्ग़र का लहू मांगे है…
हाय करबल में रही सकीना बीबी,
और कुबरा वहाँ क़ासिम सा बना मांगे है…
बख़्श दे नाना की उम्मत को ऐ रब्बे-करीम,
ये दुआ इब्ने-अली शेरे-ख़ुदा मांगे है…”
इस साबरी नशिस्त में धार्मिक और राजनीतिक हस्तियों की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। दरगाह साबिर पाक के सज्जादानशीन शाह मंज़र ऐज़ाज़ साबरी उर्फ़ अली शाह मियां का फूल-माला पहनाकर भव्य स्वागत किया गया।
प्रमुख सम्मानित अतिथि:
मुफ़्ती शमून क़ासमी (चेयरमैन, उत्तराखंड मदरसा बोर्ड)
अनीस गौड़ (प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा)
अनीस कस्सार (वरिष्ठ भाजपा नेता)
महफ़िल का समापन देर रात मुल्क में अमन, चैन, भाईचारे और तरक्की की दुआ के साथ हुआ। देश के कोने-कोने से पहुंचे जायरीनों और अक़ीदतमंदों ने इस साबरी महफ़िल का भरपूर रूहानी आनंद लिया।





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