आरिफ नियाज़ी।
रुड़की। पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ के नवासे हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और शुहदा-ए-कर्बला की याद में माह-ए-मुहर्रमुल हराम का आग़ाज़ हो चुका है। इसी क्रम में अंजुमन ग़ुलामाने मुस्तफ़ा ﷺ सोसायटी (रुड़की चैप्टर) द्वारा रामपुर रोड स्थित सपना ब्रिज के पास, उमर कॉलोनी के बाहर “हुसैन सबके हैं” थीम पर 10 दिवसीय लंगर-ए-हुसैनी का शुभारंभ किया गया।
कर्बला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) ने अपने अहल-ए-बैत और 72 वफ़ादार साथियों के साथ हक़, इंसाफ़ और इंसानियत की रक्षा के लिए शहादत पेश की। इतिहास गवाह है कि उन्होंने ज़ुल्म और अत्याचार के सामने सिर झुकाने के बजाय सत्य और न्याय का रास्ता चुना। यही वजह है कि आज भी इमाम हुसैन (अ.स.) किसी एक समुदाय या मज़हब तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए सब्र, कुर्बानी और इंसाफ़ की मिसाल माने जाते हैं।
अंजुमन के जनरल सेक्रेटरी कुँवर शाहिद ने बताया कि पिछले वर्ष की भाँति इस वर्ष भी 1 मुहर्रम से 10 मुहर्रम (रोज़ा-ए-आशूरा) तक प्रतिदिन दोपहर में वेजिटेरियन लंगर का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लंगर की थीम “हुसैन सबके हैं” रखी गई है, ताकि इमाम हुसैन (अ.स.) के पैग़ाम-ए-इंसानियत को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाया जा सके।
मुहर्रम के पहले दिन आयोजित लंगर में छोले-चावल की नियाज़ वितरित की गई, जिसमें सैकड़ों लोगों ने शिरकत कर हुसैनी नियाज़ ग्रहण की। यह लंगर पूरी तरह सार्वजनिक है, जिसमें धर्म, जाति और वर्ग से ऊपर उठकर सभी लोग शामिल हो रहे हैं।
इस अवसर पर आसिफ अली उर्फ हैदर, आसिफ़ अली, गुड्डू साबरी, रिज़वान अली, रामपाल सिंह, बिलाल खान, नसीम अहमद (साइकिल वाले), सलमान अहमद, फरजान अहमद, साहिल खान, डॉ. सैयद अतीक, गौरव बंसल, साकिब शहज़ाद, सुहेल खान, अमजद ठेकेदार सहित अंजुमन के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
अंत में वक्ताओं ने कहा कि कर्बला केवल एक तारीख़ या घटना का नाम नहीं, बल्कि इंसाफ़, इंसानियत और सच्चाई के लिए डटे रहने का पैग़ाम है, जो हर दौर में ज़िंदा रहेगा। उन्होंने लोगों से इमाम हुसैन (अ.स.) की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने की भी अपील की।





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