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रूड़की बाबा साहेब की जयंती पर नगर निगम सभागार में मेधावी छात्र-छात्राओं का हुआ सम्मान, बाबा साहब को दी गई श्रद्धांजलि।

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आरिफ नियाज़ी।
​रूड़की। संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर नगर निगम सभागार में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अंबेडकर समाज कल्याण समिति और अखिल भारतीय अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारी कल्याण संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में भारी संख्या में स्थानीय लोगों और गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की।
​​कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण समाज के होनहार और प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का सम्मान रहा। शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को मोमेंटो और उपहार देकर प्रोत्साहित किया गया। आयोजकों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से आने वाली पीढ़ी को बाबा साहेब के दिखाए मार्ग पर चलने और शिक्षा के माध्यम से समाज को सशक्त बनाने की प्रेरणा मिलेगी।
​​मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल ने बाबा साहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा:की ​”डॉ. भीमराव अंबेडकर ने ना केवल संविधान की रचना की, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को समानता का अधिकार देकर मुख्यधारा से जोड़ा। उनका जीवन संघर्ष हमें सिखाता है कि शिक्षा ही वह अस्त्र है जिससे समाज में व्याप्त कुरीतियों और भेदभाव को मिटाया जा सकता है।”
ऊर्जा निगम के पूर्व अधिशासी अभियंता रघुराज ने कहा की
​डॉ. अंबेडकर का योगदान केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने पूरे भारतीय राष्ट्र की नींव को मजबूत करने का कार्य किया। रघुराज ने कहा की भारतीय संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए एक व्यापक और लचीला संविधान तैयार किया।
​ उन्होंने जातिगत भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ जीवन भर संघर्ष किया। उन्होंने अनुच्छेद 17 जैसे प्रावधानों के जरिए अस्पृश्यता को संवैधानिक रूप से समाप्त करने की दिशा में कार्य किया।
वक्ताओं ने कहा की डॉ. अंबेडकर महिलाओं के अधिकारों के प्रबल पक्षधर थे। हिंदू कोड बिल के माध्यम से उन्होंने संपत्ति, विवाह और उत्तराधिकार में महिलाओं को समान अधिकार दिलाने की वकालत की।उनका प्रसिद्ध नारा था— “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।” उनका मानना था कि शिक्षा ही मानसिक गुलामी की बेड़ियों को काटने का एकमात्र तरीका है।
​भारत के केंद्रीय बैंक की स्थापना के पीछे उनके आर्थिक विचार की अहम भूमिका रही। साथ ही, उन्होंने श्रमिकों के लिए 8 घंटे कार्य करने की समय सीमा और न्यूनतम मजदूरी जैसे कानूनों की नींव रखी।

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