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करोड़ों खर्च के बावजूद बदहाल प्राथमिक शिक्षा, नारसन के बिझौली गांव के स्कूल में भारी लापरवाही उजागर।

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आरिफ नियाज़ी।
उत्तराखंड सरकार जहां प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपये के भारी भरकम बजट खर्च कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही है। नारसन क्षेत्र के बिझौली गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय का हाल कुछ ऐसा ही है, जहां शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतरी हुई नजर आ रही है।
इस विद्यालय में तैनात प्रधानाचार्य उर्दू विषय के अध्यापक हैं, लेकिन उन पर प्रधानाध्यापक का भी प्रभार है उनका अन्य विषयों की पढ़ाई और विद्यालय की दैनिक व्यवस्थाओं में कोई खास रुचि नहीं हैं। परिणामस्वरूप स्कूल की शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। विद्यालय में अव्यवस्था का आलम यह है कि बच्चों की पढ़ाई, साफ-सफाई और मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं भी ठीक ढंग से संचालित नहीं हो पा रही हैं।


सबसे गंभीर बात यह है कि शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारी भी इस विद्यालय की स्थिति से आंखें मूंदे हुए नजर आ रहे हैं। नियमित निरीक्षण और निगरानी के अभाव में स्कूल प्रबंधन की लापरवाही लगातार बढ़ती जा रही है।
हाल ही में नायब तहसीलदार रुड़की यूसुफ अली द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में विद्यालय की बदहाल स्थिति सामने आने से स्कूल प्रबंधन में हड़कंप मचा है। निरीक्षण के दौरान स्कूल परिसर में फैली गंदगी ने स्कूल प्रबंधन की पोल खोल कर रख दी। कक्षाओं के आसपास और रसोईघर में साफ-सफाई का अभाव साफ दिखाई दिया। मध्यान्ह भोजन योजना में भी बड़े पैमाने पर खामियां पाई गईं। रसोई में गंदगी और अव्यवस्थित हालात देखकर तहसीलदार भड़क उठे और उन्होंने मौके पर ही स्कूल प्रबंधन को जमकर फटकार लगाई।
नायब तहसीलदार यूसुफ अली ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर संयुक्त मजिस्ट्रेट को सौंप दी है। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद स्कूल प्रबंधन में हड़कंप मचा हुआ है और अब कार्रवाई की आशंका से जिम्मेदारों की चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते शिक्षा विभाग ने सख्त कदम नहीं उठाए तो बच्चों का भविष्य बेहद प्रभावित होगा। उन्होंने मांग की है कि दोषी अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं में सुधार हो सके।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और क्या वास्तव में प्राथमिक शिक्षा को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

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