आरिफ नियाज़ी।
रुड़की के रामपुर स्थित मदरसा इस्लामिया अरबिया इरफानुल उलूम एवं मदरसा मिस्बाहुल उलूम एकेडमी का अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की टीम ने निरीक्षण किया। दोनों अरबी मदरसों में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ दीनी तालीम के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी ग्रहण करते हुए मिले। प्राधिकरण का प्रयास हैं की इन मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ साथ विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान और शिक्षा से जोड़ने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है।प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ सुरजीत सिंह को निरीक्षण के दौरान यह भी जानकारी मिली हैं कि दोनों मदरसों ने शिक्षा विभाग में मान्यता के लिए आवेदन भी कर रखा है। जल्द ही दोनों अरबी मदरसों को शिक्षा विभाग से मान्यता भी मिल सकती हैं।गौरतलब है कि दोनों अरबी मदरसे पूर्व में मदरसा बोर्ड उत्तराखण्ड से मान्यता प्राप्त मदरसे रहे हैं। हालाकि बीती 30 जून 2026 को मदरसा विभाग समाप्त हो चुका है और 1 जुलाई 2026 से उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण प्रभावी हो गया है।अब मदरसों के लिए शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से जुड़ने की प्रक्रिया से पहले संबंधित संस्थान का शिक्षा विभाग से आवश्यक मान्यता प्राप्त करना भी अनिवार्य है। इसका उद्देश्य मदरसों में संचालित शिक्षा व्यवस्था को व्यापक शैक्षिक व्यवस्था से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। डॉ सुरजीत सिंह ने बताया की आस्था के साथ आधुनिक शिक्षा, परंपरा के साथ प्रगति और हर बच्चे के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना ही उनका सही मकसद हैं।





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