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साइकिल से गांव-गांव पहुंचकर शिक्षा और पर्यावरण की अलख जगा रहे डायट प्राचार्य मेराज अहमद।

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आरिफ नियाज़ी।
​रुड़की। पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए रुड़की डायट के प्राचार्य मैंराज अहमद ने एक अनोखी और सराहनीय पहल शुरू की है। मैंराज अहमद केवल दफ्तर तक सीमित ना रहकर खुद साइकिल चलाकर गांव-गांव जा रहे हैं और बच्चों के साथ-साथ ग्रामीणों को भी जागरूक कर रहे हैं।


​पर्यावरण को बचाने के लिए जहां सरकारें करोड़ों के भारी भरकम खर्च कर रही हैं, वहीं मेराज अहमद ने अपनी जीवनशैली से एक उदाहरण पेश किया है। उन्होंने रुड़की से छापुर गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय और राजकीय प्राथमिक विद्यालय तक का सफर साइकिल से तय किया हैं जो बेहद चर्चा का विषय बना हुआ है।उनका मानना है कि साइकिल चलाने से ना केवल प्रदूषण कम होता है, बल्कि यह उत्तम स्वास्थ्य का भी आधार है।
​छापुर के स्कूल पहुंचे प्राचार्य ने बच्चों से संवाद किया और उन्हें पढ़ाई के बोझ से मुक्त होकर सीखने के ‘नए टिप्स’ दिए। उन्होंने शिक्षकों और बच्चों को संदेश देते हुए कहा की
​मजबूत बुनियाद बच्चे ही देश का भविष्य हैं इसलिए उनकी प्राथमिक शिक्षा की नींव ठोस होनी चाहिए।


उन्होंने कहा की बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक विकास के लिए खेलों पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है।
​”कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे, यही हमारा लक्ष्य है। बच्चों को एक ऐसा माहौल मिलना चाहिए जहाँ वे बिना किसी डर के खेल-खेल में ज्ञान अर्जित कर सकें। प्राचार्य डायट रुड़की मैंराज अहमद ने
​एक नई मुहिम की शुरुआत की है वहीं
​छापुर पहुंचे प्राचार्य के इस अंदाज ने बच्चों और ग्रामीणों का दिल जीत लिया। अधिकारियों का यह जमीनी स्तर पर उतरकर काम करना समाज में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रहा है। डायट के प्राचार्य के पद पर तैनात मैराज अहमद ऐसे पहले प्राचार्य है जो किसी वाहन से ना जाकर स्कूलों में साईंकल से पहुँचकर पढ़ाई के स्तर को देख रहे हैँ।

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