Jan Mudde

No.1 news portal of India

नैपाल द्वारा काव्य रत्न की उपाधि से सम्मानित कवि भाषा शिक्षक डाँ अशोक पाल सिंह की नज़र में भाषा दिवस

Spread the love

अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 21 फरवरी को सम्पूर्ण विश्व भर में मनाया जाता है।

प्रस्तावना भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देते हुए मातृभाषाओ की रक्षा करने और जागरूकता फैलाने के लिए यूनेस्को,में 19 नवम्बर 1999 में मातृभाषा दिवस घोषित किया गया था। जो वर्ष 2000 ई0 से मनाया जा रहा है। यह बंगाल देश के भाषा आन्दोलन से प्रेरित सन् 1952 मे बंगाली भाषा के लिए बलिदान दिए गये थे जिस में हर किसी की अपनी भाषा मे शिक्षा और सम्मान मिले। इसका मुख्य उददेश्य दुनिया भर की लुप्त होती भाषाओ को बचाया जा सके।

शिक्षा विकास मे बहुभाषी शिक्षा को बढावा देना हेतु मातृ भाषा हमारे व्यक्तिगत के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका है जिस प्रकार माँ के दुध का महत्व हमारी मातृ भाषा हमे सामाजिक स्तर परम्परा इतिहास सांस्कृतिक मुख्य रूप से जाती है। मातृ भाषा संस्कृति की वाहिक होती है मातृभाषा हमे संस्कार और सभ्यता व्यवहार सिखाती है। हमारे देश भारत की भाषाओ को विविधता पाई जाती है। जो हम अपनी मिटटी और विरासत से भावनात्मक रूप से जोडती है।

मातृ भाषा की वर्तमान स्थिति भारत में मातृ भाषा की वर्तमान स्थिति जहाँ लगभग 45 प्रतिशत क्षेत्रीय भाषाए व्यापक रूप से बोली जाती है। विश्व स्तरीय अंग्रजी भाषा के फैशन के कारण स्थानीय भाषा और बोलियां लुप्त होने के कगार पर है।

अन्तर्राष्ट्रीय मातृ भाषा अन्तर्राष्ट्रीय मातृ भाषा कई राष्ट्र के मध्य गतिविधियो विश्वस्तर, अन्तर्देशीय एव अन्तर्राष्ट्रीय कहा जाता है। विश्वस्तर पर मातृ भाषा का संरक्षण को प्रोत्साहित करना है।

उददेश्य विश्व की भाषाओं और संस्कृति का सम्मान करना है दुनिया की विभन्न मातृ भाषाओं के प्रति लोगो का जागरूक करना दुनियों में 7,000 (सात हजार) से अधिक भाषाए बोली जाती है।

भारत में मातृ भाषा की स्थिति एव चुनौतिया उच्च शिक्षा एव प्रशासनिक कार्यों में अंग्रेजी मानशिकता एव प्रधानता, क्षेत्रीय भाषाओ के प्रति उपेक्षा मुख चुनौतिया है।

भारत मे मातृभाषा की स्थिति भारत में 121 भाषाए 10, 000 से अधिक लोगो द्वारा बोली जाती है। 1,365 से अधिक मातृभाषाए, बोलिया है। भारतीय सांवधन की आठवी अनुसूची में 22 भाषाए शामिल है।

चुनौतिया – अंग्रेजी का प्राथमिकता मातृ भाषा व्यक्ति की पहली पहचान होती है। जो परिवार समाज से मिलती है। व्यक्ति और संस्कृति भावानाओ को पहचाना है।

समाधान और सरकारी प्रयास भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 जिसमें प्राथमिक स्तर या मातृभाषा शिक्षा दिक्षा पोर्टल पर क्षेत्रीय भाषा और में पाठय पुस्तक और तकनीकी शिक्षा मे स्थानीय भाषाओ का उपयोग शामिल है।

भारतीय भाषाओं का संरक्षण एव विकास किया जाता रहा है।

मातृभाषा को लुप्त होने से बचाने के प्रयास मातृभाषा को लुप्त होने से बचाने के लिए नई शिक्षा नीति 2020 के तहत कवाड तक मातृभाषा में शिक्षा, सरकार पहल (जैसे भारती वाणी)लोक साहित्य, के समुदाय आधारित शिक्षण के माध्यम से संरक्षण प्रयास किए जा रहे है। युवा पीढी को बचपन से ही अपनी मातृ भाषा बोलने के लिए प्रोत्साहित किया जए विद्यालयो मे स्थानीय मातृभाषाओ को समझते सीखने की प्रक्रिया में तेजी आएगी, लुप्त प्राय लिखित श्रव्य और दृश्य (वीडियो) के माध्यम से दर्शाया दिखया जाये भाषाओ को
मातृभाषा का महत्व अनेक दृष्टि कोण से देखा जा सकता है।

1. मातृ भाषा सीखने और सिखाने की प्रक्रिया को सहज और प्राकृतिक

2. मातृभाषा संस्कृति और परम्पराओ का वाहक होती है।

3. व्यक्ति की भावनाओ और विचारो को प्रकार करने का सबसे प्रभावी माध्यम होती है। अपनी भावनाओ व्यक्त सरलता से कर सकें।

सुझाव – चुनौतिया

1. भारतीय बच्चे अपनी लोकभाषा में गिनती आनी चाहिए

2. छोटे बच्चो को गणित लोक भाषा पढाया जाना चाहिए

3. मातृ भाषा वार्ता करना चाहिए

4. बंगला भाषा में बेहद सुन्दर लोकगीत है जो वध के लोक गायक बाउल इक तारे के समान दिखाने वाला वाधयंत्र। रवीन्द्र नाथ टैगोर

5. भारत में 1950 से अधिक भाषाएँ मातृभाषा के तौर पर बोली जाती है जबकि 98 प्रतिशत संविधान की आठवी सूची में बताई गई 22 भाषा मे से किया मातृ भाष माना जाता है। भारत में 19500 से अधिक भाषाएँ मातृभाषा के तौर पर बोली जाती है।

6. जबकि लगभग 98 प्रतिशत लोग सविधान की आटवी सूची में बताई गई 22 भाषाओ मे से ही किसी एक को अपी मातृ भाषा मानते है।

मातृ भाषा का अर्थ मातृ भाषा व्यक्ति पहली भाषा कहते है वद्र भाषा है जो व्यक्ति बचपन से बोलाता यह केवल माँ की ही भाषा नही बल्कि परिवार और समुदाय की भाषा हो सकती है। आत्म विश्वासा और आत्म सम्मान बढता है मात भाषाओ से हिन्दी की प्रमुख बोलियो है कौरवी, हरियाणवी युवओ, कनौजी, बुन्देली, पूर्वी हिन्दी, बघेली, छत्तीस गढी भौजपुरी गढवाली कुमायूनी राज स्थानी

मातृ का अर्थ मॉ मा शब्द की उत्पत्ति मुख्य रूप से बच्चो द्वारा बोली जाने वाली सबसे सरल ध्वनि माँ माँ मानी जाती है जो दुनिया की कई भाषाओ के सम्मान संस्कृत के ‘मातृ’ से लिया गया हूँ। –

भाषा शब्द की उत्पत्ति संस्कृत की भाषा धातु से हुई जिसका अर्थ है, बोलना या कहना अभिव्यक्ति To Speak Or Say बोलना वर्तलाप या बोली जाने वाली भाषा। से है।

भाषा का अर्थ भाषा वह माध्यम है जिसके द्वारा मनुष्य विचारो या भाव को बोलकर लिखकर या सकेतो के जरिए एक दूसरे तक पहुंचाते है। उसे भाषा के कहते है। मातृ भाषामातृभाषा मात्र एक भाषा ही नही बल्कि यह व्यक्ति की पहचान और सांस्कृतिक विरासत का एक हिस्सा है।

-मातृ भाषा को अनेको नामो से जाना जाता है मातृ भाषा Mother Tongue वह भाषा जो व्यक्ति जन्म से सीखता है और बचपन से बोलाता है इसे मुख्यत पहली भाषा First Language मूल भाषा, धरेलू भाषा, क्षेत्रीय भाष, स्थानीय भाषा लोकल भखा, वाणी, वाक भाषा आदि नामो से जाना जाता भावनाओ एव विचारो को अभिव्यक्त करने का माध्यम है बद्री भाषा मातृभाषा कहलाती है। भारत की जन गणना 2011 के अनुसार भारत में कुल 121 भाषाए और 270 मातृ भाषाए है मातृ भाषा वह भाषा हैए जिसे बच्चा अपने बचपन से सीखता है यह भाषा उसके परिवार और समुदाय में बोली जाने वाली भाषा के सम्पर्क में आने से प्रभावित होती है। मातृभाषा का शाब्दिक अर्थ माता की भाषा जिसे बच्चा जन्म से सीखता है।

मातृभाषा का मूल भाषा देशी भाषा प्रथम भाषा भी कहा जाता है। मातृ भाषा को अंग्रेजी में (ative Language) एक्टिव लैंग्वेज कहते है।

मातृ भाषा भाषा का वह रूप है जो एक बच्चा परिभाषा एन सी.ई.आर.टी के अनुसार अपनी मा से, पडोस से किसी विशेष क्षेत्र या समाज से सीखता है।

विशेषता बालक के समग्र व्यक्तिव ज्ञान, पर्यावरण, शिक्षा, अपनी मुहावरे, भावनात्मक, संज्ञानात्मक सांकृतिक मूल्यो की भाहक भी है।

उददेश्य मातृ भाषा को बढावा देने को उददेश्य में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता और बहु भाषित को बढावा देना है। भारत एक बहुभाषी देश होने को कारणी मातृ भाषा के प्रति भारत उत्तदायित्व अधिक बढ जाता है।

-बहु भाषा शिक्षा के बहु भाषी शिक्षा अन्तर्राष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस 21 फरवरी 2026 की मुख्य थीम भविष्य को आकार पेन में युवाओ की भूमिका पर केन्द्रीत है मुख्य फाक्स
मातृ भाषा बालवाडी से लेकर कक्षा तीसरे प्राथमिक स्तर तक शिक्षक के माध्यम के रूप में उपयोग किया जाता है। मातृभाषा को मूल भाषा या प्रथम पहली भाषा कहा जाता है। साक्षरता और सीखने की आधार शीला है 3

इवान इलिच के अनुसार मातृ भाषा शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम कैथोलिक भिक्षुओं द्वारा उस विशेष भाषा के लिए किया गया था। जिसका वे उददेश देते समय लैठिन के स्थान पर प्रयोग करते थे। अर्थात पवित्र मात चर्च ने इस शब्द का परिचय दिया और उपनिवेशो ने ईसाई धर्म से उपनिवेश वाद के एक भाग के रूप में अपनाया।

“DES CHOOLING SOCIETY” इवान – इलिच अपनी पुस्तक “डी स्कूलिंग सोसाइटी” नामक पुस्तक में ‘मातृ भाषा शब्द का प्रयोग किया है जहाँ उन्होने संस्थागत भाषा Institutional Language के विपरीत घर और समुदाय में सीखे जाने वासली प्राकृतिक भाषा के रूप में परिभाषित किया है। लिच के अनुसार मातृ भाषा अनोप चारिक रूप से सीखने जाती है और मनवीय सम्बन्धो व सांस्कृतिक पहचान का मूल है जो स्कूली जैसे संस्थाओं द्वारा नष्ट की जा रही है।इलिच के अनुसार मातृ भाषा वह भाषा है, जिसे बच्चा अपनी माँ, परिवार और समुदाय के बीच किसी भी औपचारिक स्कूल में जाने से पहले स्वाभाविक रूप से सीखता है जो बन्धन मुक्त है।

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास क अनुसार मातृ भाषा सीखने, समझने एवं ज्ञान की प्राप्ति मे सरल है। पूर्ण राष्ट्रपति डॉ० अब्दुल कलाम ने स्वयं के अनुभव के आधार पर कहा कि मै अच्छा वैज्ञानिक इसलिए बना क्योंकि मैने गणित और विज्ञान शिक्षा मातृ भाषा को शिक्षा का आधार मान ने पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था बच्चो की रचनात्मक और वैज्ञानिक समझ को बढ़ाने के लिए विज्ञान की प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक स्थानीय भाषा मे दी जानी चाहिए, ताकि वे विषय को आसानी से समझ सके, उन्होंने स्वयं तमिल और उर्दू में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की थी। बाद में अंग्रेजी सीखी।

यह वैज्ञानिक तथ्य है कि रचनात्मक, नवचार एव शोध, अनुसंधन मातृ भाषा मे ही सम्भाव है।

भारतीय वैज्ञानिक सी.वी. श्री नाथ भारतीय भौतिक विज्ञानिक सर चन्दरोचक वेकरमन सीवी रमन कहा कि मेरे अनुभाव के अनुसार अंग्रेजी के माध्यम से इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र की डालना में भारतीय भाषाओ में पढे छात्र भारतीय भाषाओ में पढे-छात्र, अधिक वैज्ञानिक अनु संघान करते है इस नीति तथा को स्वीकार करते हुए प्रस्तावित राष्ट्रीय शोधसंस्थान में भारतीय भाषाओ में शोध हेतु आवश्यक कक्षा 8 तक की अनिवार्या रूप से मातृ भाषा होनी चाहिए

शिक्षा नीत 2020 निती के अनुसार प्रा० वि० में शिक्षा माध्यम मातृभाषा पर जोर दिया गया राष्ट्रीय शिक्षानीति 2020 स्वीकार करती है संस्कृति के संरक्षण संवर्धन और प्रसार के लिए हमे उस संस्कृति की भाषाओ का संरक्षण और संवर्धन करता करना होगा

मातृ भाषा दिवस कैसे मानाए अपनी भाषा में बात करें, काहवती एवं लो कथाओ के माध्यम से अपनी संस्कृति को समझते हुए। स्कूलो और समुदाय मे भाषाई कार्य शालाए आयोजित कर के दूसरो की भाषा सांस्कृतिक का सम्मान करे।

मातृ भाषा शिक्षा से बालको के भीतर मौलिक विचार का जगरण होता है मातृभाषा से सम्बन्ध अनुकरणात्मक एव भावात्मकता होता है।

सहजता से अपनी राय अनुभव भावनाए व्यक्ति व्यक्त कर पाता है

भाषा विचार अभिव्यक्त करने का माध्यम है भाषा से बच्चे का मानसिक विकास होता है भाषा विकास वह प्रक्रिया है जिससे शिशु ध्वनियो और छाव-भाव से शुरू करके धीरे-धीरे शब्दो और विचारो को व्यक्ति करना सीखता है, जिससे जन्म से लेकर बचपन तक कई चरण शामिल होते है।

संज्ञानात्मक सामाजिक विकास के साथ परिवार वातावरण तथा शिक्षा से प्रभावित होत है जिस से व्यकित संचार और समान्ता समाधान में सक्षम होता है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 350 ए

भाषाई समूह के बच्चो की प्राथमिक स्तर पर उन्की मातृ भाषा में शिक्षा प्रदान करने की सुविधाए से सम्बन्धित है।

जिसका उददेश्य शैक्षिक एव सांस्कृतिक अधिकारो की रक्षा करना है।

ऐतिहासिक सन्दर्भ यह प्राव धान 1956 में भाषाई अल्म संख्यक वर्गों के की प्राथमिक स्तर पर शिक्षा मातृ भाष मे देने के लिए सॉतवे संविधान संशोधन के तहत जोडा गया हैभारतीय संविधान अनुच्छेद 350 के तहत समस्या के निवारण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी शिकायत के निवारण हेतु संधमा राज्य किसी भाषा मे आवेदन करने का अधिकार देता है।

एम० के० गाँधी के अनुसार मातृ भाषा का अनादर मॉ को अपमान है। मातृ भाषा को माँ के दूध के समान बताया गया है भारतेंदु हरिश्चन्द्र ने कहा था अपनी भाषा के ज्ञान के बिना व्यक्ति अधूरा है। अपो मातृ भाषा को हम अपनाऐगे देश की शान बढाऐगे। हमारी मातृ भाषा हमारे संस्कार और हमारे संस्कृति की अमूल्य घरोहर है।

माँ का आँचल – “शिवपूजन सहाजी, मीरा, कबीर, रैदास, सूर, तुलसी, निराला, गौतमबुद्ध अपनी भाषा बोली में मातृ भाषा की अलख जगाइ

बुनियादी शिक्षा सन् 1937 भारतीय शिक्षा सम्मेलन के अधिवेशन मातृ भाषा एव अपनी संस्कृति का विकास मातृभाषा जोर दिया गया।

कोठारी आयोग 1964-66 में त्रिभाषा सूत्र (फार्मूला) का प्रस्तावति किया गया जिसे प्रथम मातृभाषा या द्वितीय भाषा होगी

1. निष्कर्ष या सारांश मातृ भाषा का महत्व व्यक्ति के सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास मे निहित है। उनकी पहचान, संस्कृति और विचारो का आधार है, हमे अपनी मातृ भाषा का सम्मान और संरक्षण करना चाहिए और अपनी आने वाली पीढियो तक पहुंचाना चाहिए, ताकि हमारी सांस्कृतिक धरोहर जो वित रहे और हमारी पहचान अक्षुण रह सके।

2. रवि शंकर भारतीय भाषाएँ एव संस्कृति विश्व की एक अनुपम धरोहर है हमे अपनी सभ्यता के बारे मे सचेत रहना चाहिए और उसे प्रोत्साहित करना चाहिए। उपसंहार – मातृ भाषा का संरक्षण नही मिलने की वजह से भारत में लगभग 50 मातृ भाषाए पिछले 5 दशको से विलुप्त हो चुकी है हमे अपनी अपनी मातृभाषा को अपनाए अपनाए ताकि आने वाली पीढी का सिखने की लिए भाषा – संस्कृति मातृभाषा का अस्तित्व को बचाने हेतु प्रत्येक वर्ष 21 फरवरी मानाया जाता है। संवाद को सरल सहज बनाती ती है।

3. सन्दर्भ ग्रन्थ एनसी ई आरटी दिल्ली की पुस्तक द्वारा

4. भारतीय शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एव (राष्ट्रीय सचिव अतुल कोटारी जी)

error: Content is protected !!
जन मुद्दे के लिए आवश्यकता है उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के सभी जिलो से अनुभवी ब्यूरो चीफ, पत्रकार, कैमरामैन, विज्ञापन प्रतिनिधि की। आप संपर्क करे मो० न० 9719430800,9557227369