आरिफ नियाज़ी
रुड़की। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 6 और 7 के छात्र-छात्राओं को अब विज्ञान की जानकारी पहले से कहीं अधिक बेहतर और व्यवहारिक तरीके से दी जाएगी। वह विज्ञान ज्ञान, जो अब तक विद्यार्थियों को कक्षा 10 में पहुँचकर मिलता था, अब कक्षा 6 और 7 में ही उपलब्ध कराया जाएगा।
इस उद्देश्य से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), रुड़की में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत विज्ञान शिक्षकों के लिए विज्ञान विषय में गतिविधि आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने हेतु दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के दौरान कक्षा 6 एवं 7 के विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया गतिविधि आधारित विज्ञान मॉड्यूल प्रस्तुत किया गया।
अब सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी विज्ञान को केवल किताबों में पढ़ने तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि प्रयोगों और गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान को समझेंगे।
इसी उद्देश्य से शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे कक्षा में पढ़ाई को रोचक और प्रभावी बना सकें।
कार्यक्रम के समन्वयक एवं डायट प्रवक्ता अनिल धीमान ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विज्ञान शिक्षण में “करके सीखने” की अवधारणा को प्राथमिकता दी गई है। यदि शिक्षक अध्यापन के साथ-साथ विद्यार्थियों को स्वयं गतिविधियों में शामिल करते हैं, तो इससे बच्चों की तार्किक क्षमता विकसित होती है और उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण मजबूत होता है।
उन्होंने कहा कि गतिविधि आधारित शिक्षण से न केवल विद्यार्थियों की जिज्ञासा बढ़ती है, बल्कि विज्ञान विषय के प्रति उनका भय भी कम होता है। इससे छात्र अवधारणाओं को लंबे समय तक याद रख पाते हैं और उन्हें दैनिक जीवन से जोड़ने में भी सक्षम होते हैं।





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