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लंढोरा बिजली घर की घोर लापरवाही आई सामने, हाईटेंशन लाइन सुधार के दौरान करंट से झुलसा लाइनमैन।

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आरिफ नियाज़ी।

लंढोरा बिजली घर पर ऊर्जा निगम की गंभीर लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। शुक्रवार क़ो लक्सर मार्ग पर बिजली की हाईटेंशन लाइन ठीक करने के दौरान लंढोरा बिजली घर पर तैनात एक लाइनमैन करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायल कर्मचारी को आनन-फानन में रुड़की के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है।

घायल लाइनमैन की पहचान युवराज पुत्र नीटू गिरी, निवासी ग्राम गाधारोना के रूप में हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार युवराज को बिना किसी आवश्यक विद्युत सुरक्षा उपकरण के हाईटेंशन लाइन सुधारने भेजा गया था। काम के दौरान अचानक करंट दौड़ गया, जिससे वह बुरी तरह झुलस गया।

घटना की सूचना मिलते ही ऊर्जा निगम के एसडीओ लंढोरा गुलशन बुलानी अस्पताल पहुंचे और घायल कर्मचारी का हालचाल जाना। इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया। हालांकि इस गंभीर हादसे के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

जब इस मामले में ऊर्जा निगम के लेबर ठेकेदार मेघराज से संपर्क किया गया तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनका विभाग से किया गया एग्रीमेंट एक माह पूर्व ही समाप्त हो चुका है और इस हादसे की जिम्मेदारी संबंधित जेई एवं एसडीओ की बनती है। ठेकेदार के इस बयान के बाद विभागीय अधिकारियों के बीच जिम्मेदारी तय करने को लेकर स्थिति और भी उलझती नजर आई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए ऊर्जा निगम के अधीक्षण अभियंता ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए हैं और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की गई है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि लाइनमैन को किस आधार पर बिना सुरक्षा उपकरणों के हाईटेंशन लाइन पर कार्य करने के लिए भेजा गया।

गौरतलब है कि लंढोरा बिजली घर पर तैनात अधिकांश लाइनमैनों के पास न तो इंसुलेटेड दस्ताने, सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट और सेफ्टी शूज जैसे अनिवार्य विद्युत सुरक्षा उपकरण हैं और न ही समय पर वेतन का भुगतान किया जाता है। कर्मचारियों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद विभाग इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।

यह पहला मामला नहीं है जब ऊर्जा निगम की लापरवाही सामने आई हो। इससे पहले भी रुड़की और भगवानपुर क्षेत्र में कई लाइनमैन ड्यूटी के दौरान हादसों का शिकार हो चुके हैं, जिनमें कुछ कर्मचारियों की जान तक चली गई। बावजूद इसके विभागीय अधिकारियों की उदासीनता लगातार बनी हुई है।

अब देखना यह होगा कि नए अधीक्षण अभियंता इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी पूर्व की घटनाओं की तरह जांच फाइलों में ही सिमट कर रह जाएगा।

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