आरिफ नियाज़ी।
राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिजौली के एक शिक्षक ऐसे भी है जिन्होंने साक्षरता को अपना मिशन बनाया है साक्षरता का रक्त उनकी रगों में तेजी से दौड़ रहा है सन 1998 से लखनऊ में एस आर सी में प्रशिक्षण लेने के बाद शिक्षक अशोक पाल साक्षरता के लिए पूरी तरह से हरिद्वार ज़िलें में जुट गए और उन्होंने साक्षरता को अपना मिशन बना लिया।
गांव-गांव में जाकर उन्होंने लोगों को साक्षर करना जरूरी समझा और आज शिक्षक अशोक पाल सैकड़ो लोगों को साक्षर कर चुके हैंआज विश्व साक्षरता दिवस के मौके पर बिजौली के राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक अशोक पाल ने स्कूली छात्र-छात्राओं के साथ एक रैली निकाली जिसमें लोगों को जागरूक किया गया रैली में छात्रों में भारी उत्साह दिखाई दिया इस दौरान शिक्षक अशोक पाल ने बड़ी बेबाकी के साथ कहा कि गांव के प्रत्येक व्यक्ति को साक्षर करना ही उनका पूरा मकसद है उन्होंने अपना पूरा जीवन अब साक्षरता के लिए लगा दिया है हालांकि शिक्षक अशोक पाल बिझोली उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा देने का काम भी करते हैं इसीलिए उन पर स्कूल की काफी जिम्मेदारी है लेकिन बावजूद इसके वह साक्षरता को अपना समय देना नहीं भूलते यही
कारण है कि वह जहां भी जाते हैं सबसे पहले साक्षरता की बात करते हैं सैकड़ो लोगों को साक्षर बना चुके शिक्षक अशोक पाल के दिल में एक जुनून है और एक मुहिम के तहत वह इस कार्य में जुटे हुए हैं हालांकि उत्तराखंड सरकार हो या शिक्षा विभाग द्वारा अभी तक इस शिक्षक जो सम्मान मिलना चाहिए था वह नहीं मिल पाया है जिसके चलते शिक्षक अशोक पाल के दिल में आज भी इस बात को लेकर काफी एहसास है लेकिन इसके बावजूद भी वह साक्षरता का संदेश देने में पीछे नहीं है और उन्होंने यह बीड़ा उठाया है कि जब तक वह प्रत्येक व्यक्ति को साक्षर नहीं बना पाएंगे तब तक वह इस मुहीम को जारी रखेंगे।





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