आरिफ़ नियाज़ी।
रुड़की सीएसआईआर-सीबीआरआई ने “खंडहर से पुनर्निर्माण: 2015 नेपाल भूकंप से सीखे गए सबक” पैनल पर चर्चा की गई जिसमें पूरे देश और विदेश के वैज्ञानिक और प्रोफेसर बड़ी संख्या में पहुंचे हैं।
दरअसल 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के दस साल पूरे होने के उपलक्ष्य में, सीएसआईआर-केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), रुड़की ने 13 मई, 2025 को “खंडहर से लचीलापन: सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए 2015 नेपाल भूकंप से सबक” शीर्षक पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया। कार्यक्रम की शुरुआत सीएसआईआर सीबीआरआई के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप कुमार के अध्यक्षीय सम्बोधन से हुई, जिसके बाद डॉ. अजय चौरसिया ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के तहत नेपाल में स्कूलों और अस्पतालों के पुनर्निर्माण में सीबीआरआई के योगदान पर प्रस्तुति दी। इन प्रयासों को प्रदर्शित करने वाली एक विशेष वृत्तचित्र फिल्म, “खंडहर से लचीलापन” भी जारी की गई।
इस कार्यक्रम में भारत और नेपाल के प्रमुख विशेषज्ञ, इंजीनियर, आर्किटेक्ट और नीति निर्माता पुनर्निर्माण प्रयासों पर विचार करने और सुरक्षित बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण सबक साझा करने के लिए एक साथ आए। पैनल में प्रो. सी.वी.आर. मूर्ति, प्रो. डी. श्रीनागेश, प्रो. योगेंद्र सिंह, श्री अनूप कारंत, डॉ. अरुण कुमार, श्री जितेंद्र सिंह, डॉ. हरि कुमार, प्रो. रूपेन गोस्वामी, डॉ. अजय चौरसिया, श्री एसके नेगी और डॉ. डीपी कानूनगो जैसे प्रसिद्ध विशेषज्ञ शामिल थे। सीएसआईआर-सीबीआरआई के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार ने चर्चा का संचालन किया। दोनों देशों के 300 से अधिक इंजीनियर सीएसआईआर-सीबीआरआई के यूट्यूब और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से इस कार्यक्रम में लाइव शामिल हुए।
चर्चा का मुख्य निष्कर्ष यह निकला कि स्थानीय इंजीनियरों, राजमिस्त्रियों और अधिकारियों के बीच क्षमता निर्माण को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता है, और भूकंप सुरक्षा पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम को संशोधित करना है। विशेषज्ञों ने कमजोर इमारतों, विशेष रूप से स्कूलों, अस्पतालों और विरासत संरचनाओं को फिर से तैयार करने के महत्व पर प्रकाश डाला।
पैनल ने भूकंप, भूस्खलन और बाढ़ के जोखिमों को नियोजन में सम्मिलित करते हुए बहु-खतरे जोखिम क्षेत्रीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने भारतीय मानकों (आईएस कोड) को नियमित रूप से अपडेट करने और गैर-संरचनात्मक तत्वों जैसे कि इनफिल दीवारों और फिक्स्चर पर अधिक ध्यान देने का भी आह्वान किया, जो अक्सर भूकंप के दौरान चोटों का कारण बनते हैं। जीआईएस, ड्रोन और त्वरित आकलन जैसे आधुनिक उपकरणों के उपयोग को भविष्य की तैयारियों के लिए आवश्यक माना गया।
कार्यक्रम का समापन श्री एस.के. नेगी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी प्रतिभागियों द्वारा साझा की गई मूल्यवान अंतर्दृष्टि की सराहना की और भूकंप-प्रवण क्षेत्रों में लचीले बुनियादी ढांचे के विकास के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि की। श्री आशीष पिप्पल, मिकी दलबेहरा, डॉ. चन्दन स्वरूप मीना, आशीष कपूर, समीर यादव, श्री अमित कुश और कई अन्य लोगों ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए हर संभव प्रयास किया और इस अवसर पर उपस्थित थे।





More Stories
रुड़की में एक कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा और राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल ने दिव्यांगजनों को दिए व्हीलचेयर और हेलमेट, खिले चेहरे।
धंनौरी क्षेत्र के तीन गांव में विजिलेंस और ऊर्जा निगम का छापा, बिजली चोरों में मचा हड़कंप, 21 लोग बिजली चोरी करते पकडे।
प्राथमिक शिक्षक संघ की प्रांतीय तदर्थ समिति एवं जनपदीय व क्षेत्रीय पदाधिकारियों की हुई संयुक्त बैठक।