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कलियर शरीफ दरगाह के उर्स की आधी अधूरी तैयारी से दरगाह के सज्जादा नशीं के साथ साथ शायर अफ़ज़ल मंगलौरी भी नाराज़, जल्द मिलेंगे जिलाधिकारी से

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मोहम्मद शामिक

विश्व प्रसिद्ध दरगाह कलियर शरीफ के सालाना उर्स की आधी अधूरी तैयारियों को लेकर एक तरफ जहां शायर अफ़ज़ल मंगलौरी बेहद नाराज हैं  तो वहीं उन्होंने जिलाधिकारी को इस बाबत पत्र भी भेजा है । हालांकि हज़रत साबिर साहब की दरगाह के सज्जादा नशीं  शाह अली मंज़र एजाज़ साबरी ने भी कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि विश्व प्रसिद्ध दरगाह पर देश के कोने कोने से बड़ी संख्या में ज़ायरीन पहुंचते हैं वहीं देश  की खानकाहों और दरगाहों से बड़ी संख्या में सूफी संत और मलंगों के साथ साथ सज्जादगान,साहबजादगान तशरीफ़ लाते हैं लेकिन दरगाह प्रबन्धन ने अभी तक भी उनके रहने खाने और ठहरने तक के कोई पुख्ता इंतजामात तक नहीं किये हैं

 ये लोग कहां रहेंगे कैसे रहेंगे इसका जवाब भी किसी के पास नहीं है।उन्होंने कहा कि सूफी हज़रात  की उर्स के दौरान  दरगाह की रस्मो में अहम भूमिका होती है जबकि मेला बाहर लगता है। अली शाह मंज़र एजाज़ साबरी ने कहा कि  दो साल कोरोना के चलते उर्स की रस्में प्रभावित हुईं थीं  लेकिन  उस समय मे भी  सभी सूफियों का इंतज़ाम उनके द्वारा किया जाता रहा  है रहने से लेकर खाने तक का इंतज़ाम उन्होंने स्वंय किया है।

दरगाह  प्रशासन उर्स को लेकर कतई गंभीर नहीं है लाइट से लेकर शौचालय और साफ सफाई के इंतजाम अभी अधूरे हैं इस मामले को लेकर दरगाह प्रशासन और वक्फ बोर्ड के अधिकारियों को संजीदगी दिखानी होगी।सज्जादा नशीं ने आरोप लगाया कि लंगर खाने से लेकर तमाम व्यवस्थाएं अभी तक पूरी तरह से चाक  चौबंद नहीं  हैं। उन्होंने कहा कि आधी अधूरी तैयारियो को लेकर उर्स किया जा रहा है हालांकि तमाम जनप्रतिनिधि भी इस पर आपत्ति जता चुके हैं उसके बावजूद भी मेला प्रशासन उर्स को लेकर  संजीदा नहीं है।वहीं इस बाबत विश्व प्रसिद्ध शायर अफ़ज़ल मंगलौरी ने कहा कि सूफी संतों के रुकने के  लिए दरगाह में कोई इंतज़ाम नहीं है और नाही दरगाह प्रशासन का ध्यान उर्स की व्यवस्थाओं पर है मेला प्रशासन को उर्स को लेकर बेहद गंभीर होना पड़ेगा।

साबिर सहाब की दरगाह पर देश के कोने कोने से ज़ायरीन पहुंचते हैंमेले की   पहली तारिख से ज़ायरीन बड़ी संख्या में पहुंचने भी लगे हैं।उन्होंने कहा कि जल्द ही वह जिलाधिकारी हरिद्वार से भी मिलेंगे और उनके सामने पूरी बात रखेंगे। अफ़ज़ल मंगलौरी ने बताया कि पहले दरगाह प्रशासन की ओर से सूफि संतों को चटाई, टामोटी और मिट्टी के लौटे फ्री दिए जाते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। सूफियों  के लिए कोई बेहतर इंतज़ाम अभी तक नहीं हैं।

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