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भगवानपुर की राजनीति में उबाल,देशराज कर्णवाल और ममता राकेश आमने सामने,पूर्व विधायक का होर्डिंग्स चर्चा में

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शामिक

भगवानपुर की राजनीति में इन दिनों जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है | विधायक ममता राकेश और पूर्व विधायक देशराज कर्णवाल के बीच यह टकराव जनता के बीच दिलचस्पी का कारण बना हुआ है | दरअसल भगवानपुर क्षेत्र की राजनीति में राकेश परिवार का एकछत्र राज रहा है | ग्राम प्रधान से लेकर लोकसभा चुनाव तक कोई चुनाव ऐसा नहीं रहा जिसमें राकेश परिवार का हस्तक्षेप न रहा हो लेकिन बीते सात- आठ महीने पहले उनके वर्चस्व को उस समय चुनौती मिली जब झबरेड़ा के पूर्व विधायक और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष देशराज कर्णधार ने पंचायत चुनाव में ताल ठोक दी |

बीडीसी चुनाव में उन्होंने अपनी बेटी को चुनाव मैदान में उतारा तो क्षेत्रीय विधायक ममता राकेश के माथे पर शिकन पड़ना स्वाभाविक थी | बाद के घटनाक्रम में ब्लॉक प्रमुख चुनाव के लिए विधायक ममता राकेश को अपने पुत्र और पुत्री को भाजपा में भेजने जैसे आत्मघाती राजनीतिक कदम भी उठाने पड़े | उनका उद्देश्य था कि किसी प्रकार क्षेत्र में उनका राजनीतिक वर्चस्व कायम रहे |

इसके बावजूद ममता राकेश को अपने मकसद में कामयाबी नहीं मिली और भाजपा संगठन देशराज कर्णवाल के साथ खड़ा हो गया | नतीजतन पचास वर्षों में पहली बार राकेश परिवार के बिना कोई व्यक्ति पहली बार भगवानपुर का प्रमुख बना | यह घटना राकेश परिवार के लिए अभूतपूर्व चोट थी | ऐसे में आगे चलकर विधायक ममता राकेश और पूर्व विधायक देशराज कर्णवाल के बीच टकराव अवश्यंभावी था जोकि ब्लॉक प्रमुख के शपथग्रहण के साथ ही शुरू हो गया था और गत 20 अप्रैल को बीडीसी की बैठक में दोनों के बीच खुला टकराव देखने को मिला | विधायक होने के नाते ममता राकेश बीडीसी की पदेन सदस्य हैं तो देशराज कर्णवाल सांसद डाक्टर निशंक के अधिकृत प्रतिनिधि के तौर पर बैठक में थे |

दोनों के बीच चली तू-तू, मैं- मैं के बीच कुछ बीडीसी सदस्यों ने पूर्व सलाहकार प्रमुख और राकेश परिवार के खासमखास देवेन्द्र अग्रवाल और उनकी पत्नी के कार्यकाल सम्बंधी अनियमितताओं पर कार्रवाई के लिए ब्लॉक प्रमुख को एक पत्र दिया और तत्काल कार्यवाही की मांग की | विधायक ममता राकेश इस घटना क्रम का मतलब जानती थीं| इसलिए उनका गुस्सा चरम पर था | आखिर उन्होंने पत्रकारों के सामने पूरी भड़ास निकाल और देशराज कर्णवाल को अनपढ़ तक कह दिया | पिछले दिनों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देशराज कर्णवाल का पुतला फूंका और ब्लॉक प्रमुख के त्यागपत्र की मांग की |

माना गया कि यह सब विधायक ममता राकेश की शह पर हुआ है |
देशराज कर्णवाल भी कहाँ मानने वाले हैं | आखिरकार उनकी तरफ़ से भी जवाब आना था और वह एक बैनर के रुप में इन दिनों वायरल हो रहा है | वायरल बैनर में विधायक ममता राकेश द्वारा पूर्व विधायक देशराज कर्णवाल को अनपढ़ बताने का जवाब दिया गया है | बैनर में कहा गया है कि वर्ष 2017 से 2022 तक विधायक ममता राकेश और देशराज कर्णवाल एकसाथ उत्तराखण्ड विधानसभा के सदस्य थे और विधायक के रूप में विधायी कार्य ही विधायक के मुख्य कार्य होते हैं |

वायरल बैनर में कहा गया है कि इन पांच वर्षों में विधानसभा में कुल 9393 प्रश्न पूछे गये हैं जिनमें ममता राकेश ने पांच साल में मात्र 334 प्रश्न पूछे हैं जबकि देशराज कर्णवाल ने 2710 प्रश्न पूछे हैं | इसी तरह जनता की ऐसी समस्या जिनका समधान नहीं हो पा रहा है, विधानसभा में याचिका के रूप में लगायी जाती है, दावा किया गया है कि कुल 776 में से ममता राकेश द्वारा पांच साल में केवल एक याचिका लगाई गई है जबकि देशराज कर्णवाल ने 433 याचिका लगाकर समस्या हल कराने का कार्य किया गया है |

यह भी दावा किया गया है कि कुल 40 गैर सरकारी संकल्प में से ममता राकेश द्वारा 4 और देशराज कर्णवाल द्वारा 9 संकल्प लगाये गये हैं | बहर हाल तकरार जारी है और क्षेत्र की जनता को आने वाले समय में वार पर वार देखने को मिल सकते हैं।

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