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सीएम की दौड़ में पुष्कर सिंह धामी का नाम सबसे आगे,दिल्ली रवाना,कांग्रेसी हार के बाद लगा रहे एक दूसरे पर आरोप

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अमजद उस्मानी/ आरिफ नियाजी

उत्तराखंड की पांचवी विधानसभा के चुनाव नतीजे आए हुए एक हफ्ता हो चुका  है लेकिन अभी तक भी  भारतीय जनता पार्टी  मुख्यमंत्री का नाम तय नहीं कर पाई  है हालांकि पुष्कर सिंह धामी का नाम सीएम की दौड़ में सबसे आगे  माना जा रहा है और वह दिल्ली के लिए रवाना भी हो चुके हैं।वहीं   दूसरी तरफ चुनावों में अपनी सरकार बनाने का दावा करने वाली कांग्रेस पार्टी बुरी तरह मिली हार से  अभी उबर भी नहीं पा रही है और हार के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराने का सिलसिला  फिहाल जारी है।

गौरतलब है कि उत्तराखंड विधानसभा के चुनाव परिणाम गत 10 मार्च को आ गए थे जिसमें भारतीय जनता पार्टी को उम्मीद से ज्यादा कामयाबी मिली लेकिन उसके मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपना चुनाव हार गए जिस वजह से पार्टी को मुख्यमंत्री के लिए नए सिरे से चेहरा तलाश करना पड़ रहा है  लेकिन वहीं पार्टी में करीब आधा दर्जन उम्मीदवार हाईकमान के सामने लाइन लगाए खड़े हुए  हैं जिसके चलते भाजपा  हाईकमान ने अभी तक भी मुख्यमंत्री का फैसला नहीं किया है बताया जा रहा है की कल होने वाली बैठक के  बाद पार्टी हाईकमान कोई निर्णय ले सकता है  फिलहाल पार्टी के तमाम सीनियर नेता मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल है।

पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट, राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी, सतपाल महाराज, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के अलावा निवर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री पद के मज़बूत दावेदार माने जा रहे हैं। पिछली विधानसभा के कार्यकाल में भारतीय जनता पार्टी ने तीन मुख्यमंत्री बदले थे पुष्कर सिंह धामी का नंबर सबसे बाद में आया था लेकिन उन्होंने काफी मेहनत की और सरकार की छवि सुधारने का काम किया जिसके नतीजे में पार्टी को दोबारा सत्ता में आने का मौका मिला लेकिन पुष्कर सिंह धामी की किस्मत ने उन्हें धोखा दे दिया और वह खटीमा विधानसभा क्षेत्र से अपना चुनाव हार गए इस वजह से दोबारा मुख्यमंत्री बनने के लिए उनका दावा कमजोर हो गया और उन्हें अपने लिए पार्टी में लॉबिंग करनी पड़ रही है पार्टी में उनके पक्ष में आवाज़ें भी उठ रही हैं

इनके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक एक बार फिर मुख्यमंत्री बनने के लिए दम लगाए हुए हैं केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं लेकिन वह पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता के तौर पर अपनी पहचान रखते हैं। इसलिए वह बहुत ज्यादा भाग दौड़ करते दिखाई नहीं दे रहे हैं । भाजपा हाईकमान ने यदि उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया तो अलग बात है वरना वह किसी प्रकार के विवाद में पड़ने वाले नहीं है राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी का नाम भी एक बार फिर मुख्यमंत्री के दावेदार के रूप में सामने आ चुका है

जब कभी भी उत्तराखंड में नेतृत्व की बात आती है तो अनिल बलूनी का नाम जरूर शामिल होता है हालांकि कुछ लोग इसे मीडिया में उनकी लॉबिंग से ज्यादा नहीं मानते हैं भाजपा के वरिष्ठ मंत्री सतपाल महाराज एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल है वह उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनने का सपना कांग्रेस में रहते हुए भी संजोये हुए थे लेकिन वहां हरीश रावत के चलते उनका सपना पूरा नहीं हो पाया था ।भाजपा में जाने के बाद महाराज  लगातार मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल हो गए थे 6 माह पूर्व जब पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री बनाया गया था तब भी उनकी नाराज़गी सामने आई थी हालांकि किसी तरह अमित शाह ने उन्हें मनाने का काम किया था सतपाल महाराज एक बार फिर दौड़ में शामिल नजर आ रहे हैं लेकिन उनकी पृष्ठभूमि आर एस एस की नहीं है। यह उनकी कमजोरी है।हालांकि पार्टी द्वारा राजनाथ सिंह को पर्यवेक्षक बनाया गया है जो कि 19 मार्च को देहरादून की संभावित बैठक में मुख्यमंत्री का चुनाव कराएंगे जहां तक नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी का सवाल है वह किसी जूनियर नेता को एक बार फिर मुख्यमंत्री की कमान सौंप सकते हैं इतना तय है कि जिसे भी मुख्यमंत्री बनाया जाएगा वह 2024 के लोकसभा चुनाव की रणनीति के तहत ही बन पाएगा

दूसरी तरफ कांग्रेस विधानसभा चुनाव में मिली हार से उबरने के बजाय आपस में एक दूसरे पर इल्जाम लगा रहे हैं सबसे ज्यादा निशाना पार्टी के वरिष्ठतम नेता हरीश रावत को बनाया जा रहा है उन पर पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष रंजीत  रावत ने टिकटों में पैसा लेने का आरोप लगाया है और पार्टी की हार के लिए हरीश रावत को जिम्मेदार ठहराया है पार्टी के दूसरे सीनियर लीडर प्रीतम सिंह ने भी हरीश रावत पर निशाना लगाया है। इस बार के चुनाव में कांग्रेस पार्टी की विधानसभा सीटें तो बढ़ी हैं लेकिन  सरकार बनाने में नाकाम हुए हैं।कांग्रेस के  राष्ट्रीय महासचिव एंव पूर्व सीएम हरीश रावत,राष्ट्रीय सचिव काज़ी निजामुद्दीन, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, कार्यकारी अध्यक्ष रंजीत रावत, और  भी कई बड़े नेता  अपनी सीट जितने में नाकाम साबित हुए है।

हालांकि चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी के तमाम छोटे-बड़े नेता दावा कर रहे थे कि इस बार उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बनेगी और इसका आधार सिर्फ यह था की पिछले तमाम चुनावों में भाजपा और कांग्रेस बारी बारी से सरकार बनाते रहे हैं ।इस परंपरा पर कांग्रेस नेताओं को इतना विश्वास था कि वह अपने लिए मंत्रिमंडल में मिलने वाले विभागों का तक का हिसाब लगाने लगे थे पार्टी के कई उम्मीदवार सिर्फ इस नाम पर वोट मांग रहे थे कि वह चुनाव जीतकर कैबिनेट मंत्री बनेंगे। हरीश रावत मुख्यमंत्री बनने के लिए लगातार उतावलापन दिखाते रहे हैं पार्टी हाईकमान पर उनका बराबर दबाव रहा कि उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया जाए इससे बखूबी  अंदाजा लगाया जा सकता है कि चुनाव में मिली हार से कांग्रेसी नेताओं के सपने बुरी तरह टूट गए हैं। चुनाव से पहले टिकट वितरण के दौरान कांग्रेस नेताओं की तकरार सार्वजनिक रूप से प्रदेश के लोगों के सामने आती रही है चुनाव के दौरान भी एक दूसरे को हराने का खेल कांग्रेस पार्टी में खूब खेला गया इस मामले में वरिष्ठ नेता हरीश रावत का नाम खूब चलता रहा फिलहाल कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल से इस्तीफा मांग लिया है जिन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात करके उनको अपना इस्तीफा सौंप दिया है ।लेकिन कांग्रेस में जिस प्रकार की गुटबाजी  थी उसमें प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव भी शामिल रहे हैं और हरीश रावत खेमा देवेंद्र यादव को हार के लिए जिम्मेदार मानता है । अब देखना यह है की सोनिया गांधी देवेंद्र यादव को भी उनके पद से हटाती हैं या उन पर पहले की तरह ही विश्वास बनाए रखती हैं।

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