आरिफ़ नियाज़ी
उत्तराखण्ड सरकार भले ही एक तरफ जहां प्राथमिक स्कूलों की हालत सुधारने के लाख दावे कर रही हो लेकिन ये दावे रूड़कीं के नंबर 7 प्राथमिक स्कूल में खोखले साबित हो रहे हैं। आज ये स्कूल पूरी तरह से जहां बदहाल बना हुआ है वहीं स्कूल की बिल्डिंग बेहद जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। हालांकि बरसात के दिनों में इस बिल्डिंग में हर कोई जाने से भी डरता है। स्कूल की बिल्डिंग बेहद जीर्णशीर्ण हालत में है। वहीं इस स्कूल को चलाने और ना चलाने को लेकर शिक्षकों के दो गुट उस समय सामने आ गए जब मुख्य शिक्षा अधिकारी विद्या शंकर चतुर्वेदी इस स्कूल का अचानक निरीक्षण करने पहुंच गए।
हालांकि यह स्कूल पिछले लंबे समय से बंद है इसमें काफी समय से केवलं पुस्तकों का भंडार बनाया गया था।जो आज तक बंद है लेकिन उसके बावजूद इस स्कूल की ज़िम्मेदारी ज़िला शिक्षा अधिकारी ने तेजतर्रार शिक्षक राजीव शर्मा को दी है। शिक्षा अधिकारी को उम्मीद है कि लंबे समय से बंद पड़े इस स्कूल को राजीव शर्मा ही आगे बढ़ा सकते हैं। इतना ही नहीं राजीव शर्मा ने अपने प्रयास भी तेज कर दिए हैं।वह भी स्कूल की तस्वीर बदलने के दावे कर रहे हैं उनका कहना है कि स्कूल की तस्वीर आने वाले समय मे बदली नज़र आएगी।

जहां स्कूल में रंगाई पुताई का कार्य और बैंच आदि रोटरी क्लब के द्वारा स्कूल में की जायेगी तो वहीं इस स्कूल को सुंदर और बेहतर बनाने के लाख दावे भी किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारी इस स्कूल के चलाने के पक्ष में नहीं है शिक्षक संघ के अध्यक्ष मनमोहन शर्मा और ब्लॉक मंत्री पंकज विश्नोई ,ब्लॉक कोषाध्यक्ष राजेंद्र सैनी ,जिला महामंत्री जितेंद्र कुमार चौधरी का आरोप है कि 7 नंबर प्राथमिक विद्यालय की बिल्डिंग की जर्जर हालत है कभी कोई दुर्घटना ना घटे इसलिए ऐसे जर्जर स्कूलों में रिस्क नहीं लिया जा सकता।उनका आरोप है कि सरकार ने काफी समय पहले ऐसे स्कूल दूसरे स्कूलों में पहले या तो बंद कर दिए या फिर दूसरे स्कूलों में मर्ज कर दिए।
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उन्होंने कहा कि शासनादेश के मुताबिक ऐसी जर्जर बिल्डिंग में स्कूल नहीं चल सकते जब तक उनका पूरी तरह से जीर्णोद्धार ना हो जाए। अध्यक्ष का आरोप है कि कुछ शिक्षक ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में तैनाती पाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं जबकि वह शिक्षा अधिकारियो को बंद पड़े विद्यालय खोलने के लिए शासन से अनुमति लेनी चाहिए। शासन के आदेशों का पालन करना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है उन्होंने साफ-साफ कहा कि कुछ अधिकारी अपने चहेते शिक्षकों को तैनात करने के लिए नजदीकी स्कूलों में आनन-फानन में ऐसे आदेश जारी कर रहे हैं जो पूरी तरह से गलत है पहले इस स्कूल का जीर्णोद्धार होना बेहद जरूरी है तभी ऐसे आदेश करने चाहिए रिस्क नहीं लेना चाहिए। क्योंकि आज यह स्कूल पूरी तरह से जर्जर हालत में हो चुका है कभी भी कोई बड़ी घटना ना घटे इसलिए विभाग को पहले इस स्कूल की तस्वीर बदलनी होगी।
उन्होंने मांग करते हुए कहा कि अगर ऐसे स्कूल खोलने बेहद ज़रूरी हैं तो उनमें नगर क्षेत्र के शिक्षकों को ही भेजा जाए ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य कर रहे शिक्षकों को वहीं पर कार्य करने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षक संघ स्कूल खोलने का कड़ा विरोध करेगा जब तक इस स्कूल की बिल्डिंग को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जाता तब तक इस स्कूल को नहीं चला जाना चाहिए। प्राथमिक शिक्षक संघ ज़िले से लेकर शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से इसकी शिकायत करेगा। वहीं उप खंड शिक्षा अधिकारी कुंदन सिंह का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है जो भी मुख्य शिक्षा अधिकारी के आदेश होंगे उस पर अमल किया जाएगा।



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