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कलियर शरीफ 758वें सालाना उर्स और ईद-ए-मिलादुन्नबी पर जायरीनों का सैलाब, देश में अमन-चैन और खुशहाली के लिए विशेष दुआएं।

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आरिफ नियाज़ी।
​कलियर शरीफ
हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स और ईद-ए-मिलादुन्नबी के मुबारक मौके पर साबिर पाक के आस्ताने पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। देश-विदेश से पहुंचे हजारों जायरीनों ने दरगाह साबिर पाक पर चादरपोशी और गुलपोशी कर अकीदत के फूल पेश किए। इस रूहानी माहौल में जायरीनों ने मुल्क में अमन, चैन, सलामती और आपसी भाईचारे की रक्षा के लिए हाथ उठाकर विशेष दुआएं मांगीं।गुरूवार सुबह से ही दरगाह परिसर और आसपास का इलाका साबरी रंग में रंगा नजर आया। दूर-दूर से आए अकीदतमंद हाथों में साबरी परचम (झंडे) थामे जुलूस की शक्ल में साबिर पाक के आस्ताने पर पहुंचने लगे। “या साबिर” के नारों से पूरा कलियर शरीफ गूंज उठा। अकीदतमंदों ने कतारबद्ध होकर बारगाह-ए-साबरी में माथा टेका और मन्नत की डोर बांधी।इस दौरान ‘जुलूस-ए-मुहम्मदी’
ईद-ए-मिलादुन्नबी के इस मुकद्दस मौके पर मदरसा दारुल उलूम साबरिया कादरिया बरकाते रज़ा की जानिब से एक विशाल जुलूस-ए-मुहम्मदी निकाला गया। इस नूरानी जुलूस में अरबी मदरसों के तलबा (छाउलेमा-ए-इकराम और बड़ी तादाद में जायरीन शामिल हुए। जुलूस के दौरान आका की शान में नात-ए-पाक पढ़ी गईं और दुरूद-ओ-सलाम का नजराना पेश किया गया।इस मौक़े पर मदरसा प्रबंधक मौलाना गुलाम नबी नूरी ने मुल्क की सलामती, तरक्की और आपसी सौहार्द के लिए विशेष दुआ कराई। इस मौके पर उन्होंने कहा क़ी आज का दिन बेहद मुबारक और खास दिन है। साबिर पाक के उर्स और ईद-ए-मिलादुन्नबी का यह दोहरा संगम पूरी दुनिया को मोहब्बत और शांति का पैगाम देता है। देश-विदेश से लोग यहां अपनी मुरादें लेकर पहुंचे हैं। हमने दरगाह शरीफ में अपने मुल्क की खुशहाली, भाईचारे और प्रदेश की दिन-दुगुनी-रात-चौगुनी तरक्की के लिए खास इल्तिजा की है।”
​इस दौरान पूरे कलियर क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे और जायरीनों के लिए लंगर व खिदमत के विशेष इंतजामात किए गए।

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