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मंगलौर में ‘जश्न-ए-इमाम हुसैन (अ.स.)’ सेमिनार में गूंजी इकरा हसन की बुलंद आवाज़, राजनीति और नफरत पर किया तीखा प्रहार

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आरिफ नियाज़ी

मंगलौर में हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की विलादत के कार्यक्रम की 50वीं स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित सेमिनार में देश की कई नामचीन हस्तियों ने शिरकत की। इस ऐतिहासिक सेमिनार में कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन का संबोधन खास आकर्षण का केंद्र रहा।

जैसे ही सांसद इकरा हसन का सेमिनार पंडाल में आगमन हुआ, पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अपने प्रभावशाली संबोधन में इकरा हसन ने देश की मौजूदा राजनीति और हालात पर खुलकर अपनी बात रखी।


उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “जो प्रधानमंत्री संसद में आने से डरता हो, ऐसे प्रधानमंत्री की आज इस देश को ज़रूरत नहीं है।” इकरा हसन ने बेबाक लहजे में कहा कि आज देश के हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं और नफरत फैलाने वाली ताकतों को सबक सिखाना ज़रूरी हो गया है।

कोटद्वार की घटना का ज़िक्र करते हुए उन्होंने दीपक कुमार की खुलकर सराहना की और कहा कि समाज को आज ऐसे ही साहसी और जागरूक हिंदू भाइयों की ज़रूरत है, जो नफरत और ज़हर फैलाने वालों के खिलाफ खड़े हों। उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि हम उन ताकतों से सावधान रहें, जो देश को कमजोर करने का काम कर रही हैं।

इकरा हसन का यह संबोधन ना सिर्फ़ सेमिनार की सबसे अहम कड़ी बना, बल्कि श्रोताओं के बीच एक गहरी सोच और संदेश छोड़ गया। हालांकि मंच पर बैठे उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने इकरा हसन को टोकते हुए कहा की यह राजनैतिक मंच नहीं है इस पर इकरा हसन ने शादाब शम्स को करारा जवाब देते हुए कहा की आज के समय में राजनीति भी बेहद ज़रूरी है राजनीति के बिना कुछ नहीं और उन्होंने अपना सम्बोधन जारी रखा। हालांकि इस कार्यक्रम में पहुंचे राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंद्रेश कुमार ने हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) के जीवन और उनके आदर्शों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

इंद्रेश कुमार ने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन ने सिर्फ़ अपने दौर के लिए नहीं, बल्कि आने वाली हर पीढ़ी के लिए इंसानियत, भाईचारे, अमन और देशभक्ति का अमर संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “इमाम हुसैन का संघर्ष सत्ता के लिए नहीं, बल्कि सच, न्याय और वतन की इज़्ज़त के लिए था।”

आज की राजनीति पर अपने विचार रखते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा कि मौजूदा दौर में राजनीति का उद्देश्य सेवा से भटकता नज़र आ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर आज के नेता इमाम हुसैन के जीवन से सीख लें, तो नफरत, हिंसा और विभाजन की राजनीति अपने आप समाप्त हो सकती है।
उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि देश को मज़बूत बनाने के लिए धर्म, जाति और मज़हब से ऊपर उठकर सोचने की ज़रूरत है। “वतन सबसे पहले है और वतन की हिफ़ाज़त ही सच्ची इबादत है,” यह संदेश हज़रत इमाम हुसैन के जीवन से मिलता है।

इंद्रेश कुमार के संबोधन ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को गहराई से सोचने पर मजबूर किया और सिल्वर जुबली के इस आयोजन को एक मज़बूत वैचारिक दिशा दी।इस मौक़े पर कार्यक्रम के आयोजक सैयद अली हैदर ज़ैदी ने सभी अतिथियों का शॉल देकर सम्मान किया। इस अवसर पर उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स, मौलाना गज़नफर अब्बास तूसी, स्वामी डॉ सुनीता झींगरन राज्य मंत्री शादाब शम्स, विधायक काज़ी निजामुद्दीन, राव आफाक, मोंटी अंसारी, ताहिर मुस्तफा,प्रो शाहिद अखतर, प्रो अख्तर उल वासे, पूर्व मंत्री मौलाना सैयद जावेद आब्दी,हाज़ी अमीर हसन अंसारी, डॉ एस अहमद ज़ैदी,नजीब इलाहबादी, मोहम्मद हुसैन कौसर ज़ैदी,आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।कार्यक्रम का संचालन प्रो नाशीर नकवी, ने किया।

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