आरिफ नियाज़ी।
रुड़की।गलती मान लेना ही नहीं,उसे सुधारने का साहस दिखाना ही सच्ची नेतृत्व क्षमता है।पिछले दिनों अनजाने में दिए वक्तव्य का हरक सिंह रावत ने आज गुरुद्वारे में जूता सेवा कर प्रायश्चित किया।जब इंसान अपनी भूल स्वीकार कर विनम्रता से आगे बढ़ता है,तो वही उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने आज गुरुद्वारे में सेवा कर सिख समाज से अनजाने में हुई भूल का परिशोधन किया।
यह कदम एकता,सम्मान और सद्भाव की मिसाल है।सिख परंपरा हमें सिखाती है कि सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं।गलती पर माफी और माफी के बाद सेवा यही सच्ची मानवता है।

सम्मान और सद्भाव का यह कदम स्वागतयोग्य है।भूल स्वीकार ने से बड़ा कोई साहस नहीं।गुरुद्वारे में सेवा कर हरक सिंह रावत ने सिख भाइयों से अनजाने में हुई भूल का प्रायश्चित किया और कहा कि मेरी समझ में अब इस मामले को और तूल नहीं दिया जाना चाहिए।





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