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बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकार का सख्त कदम,देहरादून में तीन मदरसे सील,मुफ़्ती रईस के मदरसे पर भी हुई कार्यवाई।

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आरिफ नियाज़ी।
प्रदेश में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित एवं आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा बिना मान्यता संचालित शिक्षण संस्थानों के विरुद्ध निरंतर अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में देहरादून जिले में तीन मदरसों पर सख्त कार्रवाई की है।इन अरबी मदरसों में मुफ़्ती रईस का अरबी मदरसा भी शामिल है।

जांच के दौरान मदरसा जामिया-तुस-सलाम अल-इस्लामिया, आजाद कॉलोनी, सी-15, मस्जिद के पास, जिसके प्रबंधक मुफ्ती रईस हैं, को निर्धारित मानकों के अनुरूप आवश्यक मान्यता ना होने के कारण सील कर दिया गया है।वहीं मदरसा दार-ए-अरकम, आजाद कॉलोनी, माजरा, देहरादून तथा मदरसा दारूल उलूम रहीमिया, नियर मक्का मस्जिद, देहरादून के प्रबंधकों द्वारा स्वयं लिखित रूप से अवगत कराया गया है कि उनके द्वारा वर्तमान में मदरसा संचालित नहीं किया जा रहा है तथा वहां अध्ययनरत बच्चों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है। दोनों संस्थानों के प्रबंधकों द्वारा इस संबंध में लिखित अंडरटेकिंग भी प्रस्तुत की गई है। हालांकि इससे पूर्व दो मदरसें हल्द्वानी में भी सील हुए
जिनमें .मदरसा जामिया नूरिया बरकतें ए आमिना शनि बाजार रोड गौजाजाली उत्तर प्रदेश तथा रमजान ऑर्गेनाइज़ेशन इमाइजेशन के नाम शामिल है
दरअसल उत्तराखंड सरकार की स्पष्ट नीति है कि प्रदेश में कोई भी शिक्षण संस्था निर्धारित नियमों एवं मानकों की अनदेखी करते हुए संचालित न हो। बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और उनके भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
वहीं राज्य सरकार द्वारा अब तक कुल 17 मदरसों को सील किया जा चुका है, जिनमें उधम सिंह नगर में 8, हरिद्वार में 4, नैनीताल में 4 तथा देहरादून में 1 मदरसा शामिल है।इस दौरान अल्पसंख्यक शिक्षण प्राधिकरण के चेयरमैन डॉ सुरजीत सिंह गांधी नें बताया क़ी
जो संस्थान बिना मान्यता के संचालन जारी रखेंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मदरसों को सील करने की प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी और यह अभियान तब तक चलता रहेगा, जब तक सभी संबंधित संस्थान निर्धारित मानकों को पूरा कर शिक्षा विभाग से आवश्यक मान्यता प्राप्त नहीं कर लेते।

सरकार का उद्देश्य किसी संस्था अथवा समुदाय को परेशान करना नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करना है। बच्चों का भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी उद्देश्य से नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन द्वारा निरंतर कार्रवाई की जा रही है।

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